छत्तीसगढ़ के अधिवक्ताओं का दिल्ली में प्रदर्शन, राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के वकीलों ने शुक्रवार को दिल्ली में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। धरना प्रदर्शन में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भी शामिल हुए। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अब्दुल वहाब खान के नेतृत्व में राज्य अधिवक्ता संघ छत्तीसगढ़ के आवाह्न पर एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट सहित अन्य मांगें पूरी करने के लिए आंदोलनरत है।
ये हैं पांच सूत्रीय मांगें
अधिवक्ताओं की मौत पर दावा की राशि को 10 लाख रुपए किए जाने, राज्य एवं केंद्र सरकार के विभिन्न आयोग में अध्यक्ष व सदस्य के पद पर वकीलों की ही नियुक्ति करने, वकीलों का सामूहिक जीवन बीमा करने के साथ अधिवक्ताओं को देश के चुनिंदा अस्पतालो में निशुल्क इलाज की सुविधा दिए जाने की मांग की जा रही
दिल्ली में हुए एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोरे कला, उमेश बाबू चौरसिया सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित हुए। धरना प्रदर्शन का संचालन करते हुए अधिवक्ता बृजेश सिंह ने छत्तीसगढ़ राज्य एवं देश के समस्त अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट एवं देश के चुनिंदा चिकित्सालयो में अधिवक्ताओं को निशुल्क चिकित्सा सुविधा दिलवए जाने की मांग का समर्थन किया।
प्रदर्शन के दौरान खरसिया अधिवक्ता संघ के रामाधार बघेल, अरुण अरोरा अधिवक्ता युगल किशोर वैष्णव, मुंगेली अधिवक्ता संघ से राजेंद्र चंद्रवंशी, विजेंद्र सिंह एवं संतोष ठाकुर अधिवक्ता उपस्थित रहे। चांपा से विजय कुमार पटेल, नरेश कुमार गोयल, भिलाई से एम रवि अधिवक्ता, बिलासपुर के अधिवक्ता केके सिंह, अभिषेक डहरिया, रोहन शर्मा, लक्ष्मी नारायण आदि ने धरना प्रदर्शन में उपस्थित होकर विचार व्यक्त किए।
अर्जुन राम मेघवाल को सौंपा ज्ञापन
राज्य अधिवक्ता संघ के अधिवक्तागण अब्दुल वहाब खान एवं विजय सिंह, एम रवि विजय सिंह, राजेंद्र चंद्रवंशी, रामाधार बघेल, अरुणा अरोड़ा, युगल किशोर वैष्णव, विजय कुमार पटेल, नरेश कुमार गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को उक्त मांगों का ज्ञापन उनके सचिवालय में सौंपा



