Chaitra Navratri 2023 : मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि शुरू, नवरात्रि में क्यों बोई जाती है जौ

आज से देवी आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो गए हैं। अब से लगातार 9 दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा और साधना बड़े ही भक्ति भाव से की जाएगी। चैत्र नवरात्रि के शुरू होने के साथ ही आज से हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ हो गया है। महाराष्ट्र में चैत्र प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है।
जानिए हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2080 की खास बातें
आज से हिंदू कैलेंडर के नए वर्ष विक्रम संवत 2080 की शुरुआत हो गई है। चैत्र का महीना हिंदू कैलैंडर का पहला और फाल्गुन आखिरी महीना होता है। विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने शुरू की थी।
हिंदू नववर्ष की शुरूआत शुभ योग के साथ
चैत्र प्रतिपदा तिथि से ही नवरात्रि के शुरू होने के साथ नया हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2080 भी शुरू हो चुका है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन ब्रह्रााजी ने सृष्टि की रचना की थी। इस बार हिंदू नववर्ष 2080 के पहले दिन की शुरुआत बहुत ही शुभ योग के साथ हुई है। ज्योतिष गणना के मुताबिक आज 4 तरह के राजयोग बना हुआ है। जिसमें गजकेसरी, बुधादित्य, हंस और नीचभंग राजयोग है। इसके अलावा आज ही शुक्ल और ब्रह्रा योग भी बन रहा है।
नवरात्रि में क्यों बोए जाते हैं जौ
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ जौ का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन ही घटस्थापना के साथ ही जौ बोए जाते हैं। मान्यता है कि इसके बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी रह जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की तब वनस्पतियों में जो फसल सबसे पहले विकसित हुई थी वो जौ ही थी। यही वजह है कि नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ पूरे विधि-विधान से जौ बोई जाती है। विज्ञापन
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना और साधना का महापर्व आरंभ हो जाता है। नवरात्रि में देवी पूजन के लिए कई तरह की सामग्रियों की जररूत होती है।
- चौड़े मुंह वाला मिट्टी का बर्तन
- पवित्र जगह की मिट्टी
- 7 प्रकार के अनाज
- कलश
- जटाओं वाला नारियल
- लाल रंग का कपड़ा
- फूल
- माला
- मिठाई
- दूर्वा
- सिंदूर
- गंगाजल
- कलावा
- सुपारी
- आम या अशोक के पत्ते
- अक्षत



