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नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना, महिषासुर का वध कर बनी थीं शक्ति का प्रतीक; जानें पूजा विधि और मंत्र

रायपुर, 16 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र का छठा दिन आज शुक्रवार को मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी साहस, शक्ति, आत्मविश्वास और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक हैं। नवरात्र के इस पावन अवसर पर भक्त विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, खुशहाली और परिवार की मंगलकामना करते हैं। विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति की कामना करने वाले श्रद्धालु भी मां कात्यायनी की विशेष पूजा करते हैं।

मां कात्यायनी की पूजा का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। उनका स्वरूप अन्याय और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। मां कात्यायनी का नाम महर्षि कात्यायन के नाम पर पड़ा। मान्यता है कि महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनकी पुत्री के रूप में अवतार लिया था।

मां कात्यायनी सिंह पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। उनकी आराधना से भक्तों को साहस, दृढ़ संकल्प और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।

मां कात्यायनी की पूजा विधि

नवरात्र के छठे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू करें।

  • मां को ताजे फूल, अक्षत, कुमकुम और चंदन अर्पित करें।
  • अपनी परंपरा के अनुसार दीपक और धूप जलाकर मां की आराधना करें।
  • मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें।
  • अंत में मां की आरती कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।

मां कात्यायनी के मंत्र

1. मां कात्यायनी का नाम मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

2. मां कात्यायनी का ध्यान मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों का मां के प्रति विश्वास मजबूत होता है।

मां कात्यायनी को क्या भोग लगाएं?

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार फल, मिठाई और मेवे भी अर्पित कर सकते हैं। मान्यता है कि मां को भोग अर्पित करने से जीवन में मधुरता, सद्भाव और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।

छठे दिन हरे रंग का महत्व

नवरात्र के छठे दिन हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है। हरा रंग प्रकृति, हरियाली, नई शुरुआत, विकास और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन भक्त हरे रंग के वस्त्र धारण कर मां कात्यायनी की पूजा करते हैं। हालांकि, रंगों से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।

विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति के लिए भी होती है पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी की जाती है। श्रद्धालु इस दिन पूरे विश्वास और भक्ति के साथ मां की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन और मनचाहे जीवनसाथी की कामना करते हैं।

नवरात्र का छठा दिन भक्तों को यह संदेश देता है कि साहस, विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। मां कात्यायनी की आराधना के साथ श्रद्धालु बुराई पर अच्छाई की विजय और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं।

नोट: पूजा विधि, रंग और भोग से जुड़ी जानकारियां धार्मिक मान्यताओं एवं परंपराओं पर आधारित हैं।

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Manish Tiwari

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