ओडिशा से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचे चीफ जस्टिस केआर महापात्रा, स्वागत समारोह में बोले- न्याय के प्रति प्रतिबद्धता रहेगी सर्वोच्च

बिलासपुर, 08 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कृष्णा राम महापात्रा (के. आर. महापात्रा) के पदभार ग्रहण करने के बाद उनके सम्मान में ओवेशन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान न्यायपालिका, महाधिवक्ता कार्यालय और हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ की ओर से उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस के. आर. महापात्रा ने कहा कि उनके स्वागत में कही गई बातें केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और एक बड़ी जिम्मेदारी की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। साथ ही पक्षकारों के विश्वास और उनकी अपेक्षाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के संबंधों का किया उल्लेख
चीफ जस्टिस महापात्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की पावन भूमि ओडिशा से मां महामाया की पवित्र भूमि छत्तीसगढ़ आना उनके लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच केवल भौगोलिक सीमा का संबंध नहीं है, बल्कि संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जीवन में भी कई समानताएं हैं।
उन्होंने महानदी को ओडिशा और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायपालिका से जुड़े सभी लोगों के सहयोग से हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली और न्याय व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने किया स्वागत
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने नए चीफ जस्टिस का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की समृद्ध न्यायिक परंपरा को आगे बढ़ाने में जस्टिस महापात्रा का नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महाधिवक्ता और हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ की ओर से भी उनका अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर भी चर्चा हुई।
कौन हैं जस्टिस कृष्णा राम महापात्रा?
जस्टिस कृष्णा राम महापात्रा का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ था। उनके स्वर्गीय पिता जस्टिस शरत चंद्र महापात्र भी न्यायपालिका में महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं। पिता से प्रेरित होकर उन्होंने न्याय के क्षेत्र को अपना करियर बनाया।
उन्होंने बीए के बाद एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसके बाद 7 फरवरी 1988 को उनका उड़ीसा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण हुआ। लगभग 26 वर्षों तक वकालत करने के दौरान उन्होंने सिविल, क्रिमिनल, सर्विस और संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों में पैरवी की।
उन्होंने गार्डियंस एंड वार्ड्स एक्ट, हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्डियनशिप एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट से जुड़े मामलों में भी काम किया। वे राज्य सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील और ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) के अधिवक्ता भी रहे। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और NIOS का कानूनी प्रतिनिधित्व किया।
2015 में बने हाईकोर्ट जज
जस्टिस महापात्रा को 17 अप्रैल 2015 को ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। न्यायाधीश के रूप में उन्होंने मध्यस्थता, संवैधानिक अधिकारों और अन्य महत्वपूर्ण कानूनी मामलों पर कई अहम फैसले दिए।
अब उनके न्यायिक करियर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। 1 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। लगभग चार दशक के कानूनी और न्यायिक अनुभव के बाद यह नियुक्ति उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में मानी जा रही है।



