शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: ED और राज्य सरकार की जमानत रद्द करने की याचिकाएं खारिज

नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का निर्देश भी दिया।
यह फैसला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनाया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नियमित रूप से जमानत आदेशों को चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि केवल कानूनी त्रुटि के आधार पर किसी आरोपी की स्वतंत्रता समाप्त करना उचित नहीं माना जा सकता और इस विषय पर व्यापक विचार की आवश्यकता है।
इससे पहले 2 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल को ED और EOW/ACB द्वारा दर्ज दोनों मामलों में नियमित जमानत दी थी। हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि मामले की जांच लंबे समय से जारी है और सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद जमानत दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुए कथित शराब घोटाले में राज्य को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार इस कथित घोटाले का आकार करीब 3,500 करोड़ रुपये का है। आरोप है कि इस दौरान अवैध वसूली और शराब कारोबार से जुड़े आर्थिक लाभ विभिन्न लोगों तक पहुंचे, जिनमें चैतन्य बघेल का नाम भी शामिल किया गया। इसी मामले में ED ने उन्हें जुलाई 2025 में और EOW ने सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा ED और राज्य सरकार की याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रहेगी। वहीं, शराब घोटाले की जांच और इससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई अलग से जारी रहेगी।



