विधानसभा में भावना बोहरा ने उठाए जनहित के बड़े मुद्दे: वनांचल की बिजली, राजस्व और वन श्रमिकों पर सरकार ने दिए विस्तृत जवाब

रायपुर, 13 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने पंडरिया विधानसभा और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रश्न उठाए। उन्होंने वनांचल क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति, रजिस्ट्री में स्वतः नामांतरण, कबीरधाम जिले के लंबित राजस्व प्रकरणों तथा वन सुरक्षा समिति, लघु वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े श्रमिकों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
वनांचल के 71 परिवार अब भी बिजली से वंचित
भावना बोहरा ने पूछा कि तेलियापानी, बिरहुलडीह, कांदावाणी, छीरपानी, रूख्मीदादर, छिंदीडीह और अमनिया सहित 20 से अधिक गांव अब भी नियमित बिजली सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने गांववार जानकारी, सौर ऊर्जा व्यवस्था, रखरखाव और मुख्य विद्युत ग्रिड से जोड़ने की कार्ययोजना पर सवाल किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखित उत्तर में बताया कि 06 ग्राम पंचायतों के 20 गांवों में से 08 गांव अब भी परंपरागत विद्युत व्यवस्था से अविद्युतीकृत हैं। वर्तमान में 71 परिवार पूरी तरह बिजली से वंचित हैं, जबकि 1,127 परिवार केवल सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं।
सरकार ने बताया कि इन गांवों में सोलर पावर सिस्टम उपलब्ध कराया गया है, जिससे रात्रिकालीन प्रकाश और मोबाइल चार्जिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं। सौर संयंत्रों की निगरानी स्थानीय ग्रामीण करते हैं तथा 5 वर्ष की वारंटी अवधि तक संबंधित एजेंसी और उसके बाद क्रेडा रखरखाव करती है। सघन वन क्षेत्र होने के कारण इन गांवों को फिलहाल मुख्य विद्युत ग्रिड से जोड़ने की किसी कार्ययोजना में शामिल नहीं किया गया है।
स्वतः नामांतरण प्रणाली पर भी उठाए सवाल
विधायक ने पूछा कि रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया में पटवारी और तहसीलदार को सभी प्रकरण दिखाई देते हैं या नहीं तथा तकनीकी समस्याओं की स्थिति क्या है।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने लिखित उत्तर में बताया कि विक्रय विलेखों के मामलों में स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया जारी है। भुइयां पोर्टल पर सभी प्रकरण प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रावधान किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 01 मार्च 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 9 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें दुर्ग में 7 और महासमुंद में 2 शिकायतें थीं। ये शिकायतें नाम सुधार, खसरा और रकबा सुधार से संबंधित थीं और सभी का निराकरण किया जा चुका है।
कबीरधाम में धारा 115 के 372 प्रकरण लंबित
भावना बोहरा ने भू-राजस्व संहिता की धारा 115 (त्रुटि सुधार) के लंबित मामलों पर भी प्रश्न किया।
लिखित उत्तर में बताया गया कि कबीरधाम जिले में कुल 372 मूल एवं अपील प्रकरण लंबित हैं। इनके लंबित रहने का प्रमुख कारण पक्षकारों की अनुपस्थिति और साक्ष्य प्रस्तुत करने में देरी है।
सरकार ने बताया कि मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व शिविर और ई-कोर्ट के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है। इन मामलों के निपटारे की समय-सीमा 45 कार्य दिवस निर्धारित है। नोटिस समय पर तामील कराने के लिए माल जमादार और ग्राम कोटवारों को निर्देश दिए गए हैं।
वन श्रमिकों को मिल रही हैं ये सुविधाएं
विधायक ने वन सुरक्षा समितियों, लघु वनोपज तथा तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े श्रमिकों, संग्राहकों और समिति सदस्यों को मिलने वाले लाभों की जानकारी भी मांगी।
वन मंत्री केदार कश्यप ने लिखित उत्तर में बताया कि पारिश्रमिक के अतिरिक्त इन श्रमिकों और संग्राहकों को प्रोत्साहन राशि, बीमा, सामाजिक सुरक्षा तथा उनके बच्चों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।



