
रायपुर, 10 अप्रैल 2026/11 अप्रैल को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षित गर्भावस्था को लेकर जागरूकता पर जोर दिया गया। इस मौके पर MMI नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर की सीनियर कंसल्टेंट एवं गायनेकोलॉजिकल लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. वेरोनिका आइरीन युएल ने गर्भावस्था के दौरान अपनाई जाने वाली जरूरी स्वस्थ आदतों पर विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. युएल ने बताया कि मातृत्व जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण होता है, जिसमें छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व हर महिला का अधिकार है, जिसके लिए सही पोषण, नियमित जांच और मानसिक संतुलन बेहद जरूरी है।
गर्भावस्था में अपनाएं ये जरूरी आदतें
- संतुलित आहार जरूरी: हरी सब्जियां, दूध, दाल, फल, अंडे और आयरन-कैल्शियम से भरपूर भोजन मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
- नियमित जांच कराएं: समय-समय पर एंटेनाटल चेकअप से ब्लड प्रेशर, वजन और शिशु के विकास की निगरानी संभव होती है।
- पर्याप्त आराम लें: रोज 7-8 घंटे की नींद और पर्याप्त आराम शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है।
- हल्का व्यायाम और योग: डॉक्टर की सलाह से किया गया हल्का व्यायाम शरीर को सक्रिय रखता है।
- मानसिक संतुलन बनाए रखें: तनाव से दूरी और सकारात्मक माहौल गर्भावस्था को आसान बनाता है।
- नशीली चीजों से दूर रहें: तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थ मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक हैं।
- स्वच्छता का रखें ध्यान: साफ-सफाई और स्वच्छ भोजन संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं।
- प्रसव की तैयारी जरूरी: समय पर अस्पताल पहुंचने की योजना और प्रसव संकेतों की जानकारी जरूरी है।
सरकार और संस्थाओं की भूमिका
देशभर में सरकार और FOGSI जैसी संस्थाएं महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। इसके तहत टीकाकरण, पोषण और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस यह संदेश देता है कि एक स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज की नींव रखती है। सही देखभाल, जागरूकता और परिवार के सहयोग से सुरक्षित मातृत्व को सुनिश्चित किया जा सकता है।
“स्वस्थ मां – स्वस्थ शिशु – स्वस्थ राष्ट्र”



