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गरीबी और संघर्ष के बीच वेटलिफ्टिंग में चमके बाबूलाल, खेलो इंडिया में जीता सिल्वर

रायपुर, 28 मार्च 2026।झारखंड के रामगढ़ जिले के छोटे से केरिबांदा गांव से निकलकर वेटलिफ्टिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे बाबूलाल हेम्ब्रम आज युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने जुनून और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की है।

पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह की सलाह पर बाबूलाल ने वेटलिफ्टिंग को अपनाया, लेकिन शुरुआत बेहद कठिन रही। अभ्यास के लिए न तो उपकरण थे और न ही आर्थिक सहयोग। ऐसे में उन्होंने निर्माण स्थलों पर बांस और लोहे की रॉड से ट्रेनिंग शुरू की। बाद में झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में दाखिला लेकर उन्होंने अपने खेल को नई दिशा दी। इसके लिए उन्हें रोज़ 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था।

19 वर्षीय बाबूलाल ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। उनकी मां स्कूल में रसोइया हैं, जबकि पिता छोटे-मोटे काम करते हैं। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे बाबूलाल ने हर कठिनाई को पीछे छोड़ते हुए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।

उन्होंने 2024 में चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 49 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा आईडब्ल्यूएफ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ चैंपियनशिप में भी पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया।

हाल ही में रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर बाबूलाल ने एक और उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने कहा कि यह सफलता उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करती है और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने का विश्वास देती है।

फिलहाल बाबूलाल पटियाला में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं और सीनियर सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना है कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए पदक जीतें।

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Manish Tiwari

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