जग्गी हत्याकांड फिर खुला: हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू, 1 अप्रैल को होगी फाइनल हियरिंग; अमित जोगी बोले—सत्य की होगी जीत

बिलासपुर | बड़ी खबर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस मामले की दोबारा सुनवाई शुरू हो गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संभव हो पाई है। बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में केस की सुनवाई हुई, जहां पक्षकारों ने अपने-अपने तर्क रखे।
कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है। इस दिन सीबीआई, राज्य सरकार और अमित जोगी अपना पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि यह सुनवाई इस लंबे समय से चले आ रहे केस में निर्णायक साबित हो सकती है।
अमित जोगी का बयान
सुनवाई के बाद अमित जोगी ने कहा कि वे पूरी तरह आश्वस्त हैं कि न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि “ईश्वर अब तक मेरे साथ रहा है और आगे भी रहेगा। सत्य की जीत निश्चित है।” उन्होंने लोगों से अपने और परिवार के लिए प्रार्थना करने की अपील भी की।
क्या है पूरा मामला?
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि 2007 में सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।
हालांकि, जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को चुनौती दी थी। पहले सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहा, लेकिन बाद में कोर्ट ने इसे मेरिट के आधार पर दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया।
CBI जांच और साजिश के आरोप
शुरुआती पुलिस जांच पर सवाल उठने के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया था। जांच एजेंसी ने इस केस में राजनीतिक साजिश के एंगल को भी शामिल किया था। सतीश जग्गी के पक्ष ने अदालत में दावा किया है कि हत्या तत्कालीन सरकार के संरक्षण में हुई और सबूतों को प्रभावित किया गया।
20 साल पुराना मामला, अब निर्णायक मोड़ पर
करीब दो दशक पुराने इस केस में अब 1 अप्रैल की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। इस दिन कोर्ट यह तय करेगा कि पूर्व में दिए गए फैसले बरकरार रहेंगे या मामले में कोई नया मोड़ आएगा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्याय व्यवस्था से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल केस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



