संसद में उठा इंजीनियरिंग शिक्षा का बड़ा मुद्दा: बृजमोहन अग्रवाल ने कहा— कॉलेजों में बनें ‘इंटरनल इनोवेशन सेल’, खत्म हो फर्जी इंटर्नशिप सर्टिफिकेट

रायपुर। रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता Brijmohan Agrawal ने देश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त एक गंभीर विसंगति को संसद में उठाते हुए केंद्र सरकार से बड़े सुधारों की मांग की है। उन्होंने संसद में ‘नियम 377’ के तहत सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए All India Council for Technical Education की इंटर्नशिप पॉलिसी में स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स की जरूरत बताई और “पे-फॉर-सर्टिफिकेट” के बढ़ते फर्जी बाजार को तत्काल खत्म करने की मांग की।
सांसद अग्रवाल ने बताया कि देश के करीब 5000 इंजीनियरिंग कॉलेजों में हर साल लगभग 15 लाख छात्र दाखिला लेते हैं। All India Council for Technical Education के नियमों के अनुसार दूसरे, चौथे, छठे और सातवें सेमेस्टर के बाद छात्रों के लिए औद्योगिक इंटर्नशिप अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश कॉलेज छात्रों को इंटर्नशिप दिलाने में कोई मदद नहीं करते।
उन्होंने कहा कि इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कई बोगस कंपनियों ने एक खतरनाक बाजार खड़ा कर लिया है, जहां छात्र वास्तविक प्रशिक्षण लेने के बजाय पैसे देकर इंटर्नशिप प्रमाण-पत्र खरीद रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के करीब 46 प्रतिशत छात्रों ने बिना कोई कौशल सीखे केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए निजी कंपनियों से पैसे देकर सर्टिफिकेट हासिल किए हैं। उन्होंने इसे देश की बौद्धिक संपदा और इंजीनियरिंग के भविष्य के साथ गंभीर धोखा बताया।
कॉलेजों में बने “इंटरनल इनोवेशन सेल”
सांसद अग्रवाल ने फर्जी इंटर्नशिप सर्टिफिकेट बेचने वाली संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सुझाव दिया कि कॉलेजों के भीतर ही “इंटरनल इनोवेशन सेल” बनाए जाएं। इन सेल्स में छात्रों को उद्योग जैसा वातावरण और लाइव प्रोजेक्ट्स उपलब्ध कराए जाएं, ताकि जिन्हें बाहर इंटर्नशिप नहीं मिलती, उन्हें कॉलेज परिसर में ही वास्तविक कार्य अनुभव और वैध प्रमाण-पत्र मिल सके।
कौशलयुक्त इंजीनियर तैयार करने की पहल
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के इंजीनियर केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि कौशल से भी लैस हों। उनके इस प्रस्ताव की शिक्षाविदों और छात्र संगठनों ने सराहना की है, क्योंकि यह सीधे तौर पर लाखों युवाओं के भविष्य और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।



