
रायपुर, 11 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए साय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य बल, प्रलोभन, दबाव या कपटपूर्ण तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है।
प्रस्तावित कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी दायरे में लाने की तैयारी कर रही है।
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी। प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।
कानून में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
अवैध धर्मांतरण कराने के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।
यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है तो सजा और कठोर होगी। ऐसे मामलों में 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सबसे कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। इसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।
विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।



