
रायपुर | 20 जनवरी 2026
बसंत पंचमी के अवसर पर 23 जनवरी से नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिवसीय ‘रायपुर साहित्य उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में देशभर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, विचारक और लेखक भाग लेंगे। आयोजन को लेकर साहित्य प्रेमियों और आम लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर मनाए जा रहे रजत महोत्सव की श्रृंखला में रायपुर साहित्य उत्सव एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह आयोजन न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री का विश्वास: साहित्यिक मानचित्र पर मजबूत पहचान
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक जगत में नई पहचान दिलाएगा और आम लोगों को साहित्य, लेखन व पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। उत्सव के दौरान खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विमर्श और साहित्यिक चर्चाएं होंगी।
‘आदि से अनादि’ की यात्रा का प्रतीक है उत्सव का लोगो
साहित्य उत्सव के लोगो में अंकित ‘आदि से अनादि’ वाक्य साहित्य की उस निरंतर यात्रा का प्रतीक है, जिसमें आदिकाल से लेकर आधुनिक साहित्य तक की धारा समाहित है। साहित्य समय, समाज, भाषा और पीढ़ियों को जोड़ने वाली कालातीत धारा है।
3 दिन तक साहित्य, कला और संस्कृति का जीवंत केंद्र बनेगा पुरखौती मुक्तांगन
तीन दिवसीय आयोजन में साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कला प्रदर्शनियां होंगी। इसे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
11 सत्र, समानांतर और संवाद कार्यक्रम
साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें
- 5 समानांतर सत्र
- 4 सामूहिक सत्र
- 3 संवाद सत्र शामिल होंगे।
इन सत्रों में साहित्यकारों और प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा।
पुस्तक मेला भी लगेगा, 40 स्टॉल होंगे
उत्सव के दौरान पुस्तक मेला भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें करीब 40 स्टॉल लगेंगे। यहां देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की किताबें बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगी।
चाणक्य नाटक, कवि सम्मेलन और लोक संस्कृति की झलक
रायपुर साहित्य उत्सव में ‘चाणक्य’ नाटक का मंचन किया जाएगा, जो भारतीय बौद्धिक परंपरा का प्रभावशाली उदाहरण होगा।
इसके साथ ही
- लोकनृत्य और लोकगीत
- छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- विख्यात कवियों का कवि सम्मेलन
आयोजित होंगे।
पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र भी होंगे, जिनमें समकालीन सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा की जाएगी।
नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना मुख्य उद्देश्य
रायपुर साहित्य उत्सव को युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की सहभागिता वाला सांस्कृतिक पर्व बताया जा रहा है। नई पीढ़ी को साहित्य, विचार और संस्कृति से जोड़ना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।
छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की पहल
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 को छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने वाली सशक्त पहल माना जा रहा है। यह आयोजन नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में यादगार अध्याय साबित होगा।
विनोद कुमार शुक्ल की पंक्तियां देती हैं उत्सव का भाव
भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की ये पंक्तियां साहित्य उत्सव की भावना को व्यक्त करती हैं—
हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था,
मैं व्यक्ति को नहीं,
हताशा को जानता था,
हम दोनों साथ चले,
साथ चलने को जानते थे
यही साहित्य है, जो मनुष्य को धैर्य देता है और साथ चलने की सभ्यता सिखाता है।



