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गिद्ध संरक्षण में छत्तीसगढ़ की नई उड़ान : इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना देश का मॉडल

रायपुर, 02 जनवरी 2026।छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देश को एक नई दिशा दी है। मध्य भारत के सबसे स्वच्छ नदी-वन पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल यह रिजर्व अब केवल बाघों और जंगली भैंसों तक सीमित नहीं, बल्कि विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण का एक राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इंद्रावती क्षेत्र में “गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र” (Vulture Safe Zones) विकसित किए गए हैं। इसका उद्देश्य गिद्धों की घटती आबादी को रोकना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों के अनुसार गिद्ध प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण “सफाईकर्मी” हैं और इनके न रहने से संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

10,000 वर्ग किलोमीटर में फैला गिद्धों का दायरा

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में उपग्रह आधारित टेलीमेट्री तकनीक के जरिए गिद्धों की लगातार निगरानी की जा रही है। अब तक के आंकड़े बताते हैं कि गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर के विशाल भू-भाग में सक्रिय रहते हैं और जंगलों से लेकर मानव बस्तियों तक आवाजाही करते हैं।

यह छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा वैज्ञानिक प्रयास है, जिसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा के आधार पर संरक्षण की रणनीति तय की जा रही है।

18,000 से अधिक GPS डेटा पॉइंट्स, वैज्ञानिक प्रबंधन को मजबूती

वर्ष 2022 से 2025 के बीच दो गिद्धों की सैटेलाइट ट्रैकिंग के माध्यम से 18,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले GPS डेटा पॉइंट्स जुटाए गए हैं। इससे गिद्धों की उड़ान, भोजन क्षेत्र, प्रजनन और खतरे वाले इलाकों की सटीक पहचान संभव हुई है।

इस अभियान में क्षेत्रीय जीवविज्ञानी सूरज कुमार के नेतृत्व में कार्यरत “गिद्ध मित्र दल” की अहम भूमिका रही है। यह दल घोंसलों की निगरानी, सुरक्षित शव प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसी सामुदायिक सहभागिता के चलते “गुड्डा सारी गुट्टा” जैसे दुर्गम इलाकों में पहली बार निर्बाध प्रजनन दर्ज किया गया।

“वुल्चर रेस्टोरेंट” से सुरक्षित भोजन

उप-निदेशक संदीप बलागा के मार्गदर्शन में इंद्रावती में “वुल्चर रेस्टोरेंट” स्थापित किए गए हैं। ये नियंत्रित फीडिंग सेंटर हैं, जहां केवल पशु-चिकित्सा परीक्षण के बाद NSAID-मुक्त पशु शव रखे जाते हैं। इससे गिद्धों को ज़हरीली दवाओं से बचाकर सुरक्षित भोजन मिल रहा है।

ये केंद्र स्कूलों और ग्रामीण युवाओं के लिए जागरूकता केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।

भविष्य की बड़ी योजना

कार्यक्रम के तीसरे चरण में —

  • तीन और गिद्धों की सैटेलाइट टैगिंग
  • 50 से अधिक जागरूकता अभियान
  • पंचायतों की भागीदारी से 100 किमी क्षेत्र में Vulture Safe Zone
  • छत्तीसगढ़ की पहली गिद्ध पुनर्वास कार्ययोजना का प्रकाशन

जैसे अहम लक्ष्य तय किए गए हैं।


इंद्रावती टाइगर रिजर्व आज यह साबित कर रहा है कि तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता के जरिए वन्यजीव संरक्षण और मानव विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। 🌿🦅

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Manish Tiwari

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