इमरजेंसी सर्विस डायल-112 टेंडर : 400 से ज्यादा नई गाड़ियां अमलेश्वर में खड़ी, 29 अक्टूबर तक भागीदारी की अंतिम तिथि

रायपुर, 27 अक्टूबर 2025 / राज्य में इमरजेंसी सर्विस डायल-112 को संचालित करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने नया टेंडर जारी कर दिया है। इस बार शर्तों में किए गए बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अब तक केवल लिमिटेड और प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को भागीदारी का अधिकार था, लेकिन तीसरी बार निकले इस टेंडर में सोसायटी को भी शामिल कर लिया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किस प्रकार की सोसायटी पात्र मानी जाएगी, इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं और टेंडर प्रक्रिया पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, चर्चा है कि नए नियमों का फायदा एक विशेष कंपनी को पहुंचाने के लिए यह बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों के तहत ट्रक, बस या मालवाहक वाहन संचालित करने वाली कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले सकेंगी।
400 नई गाड़ियां खरीदीं, फिलहाल इस्तेमाल नहीं
डायल-112 के लिए दो माह पहले 400 नई गाड़ियों की खरीदी की गई थी। एक गाड़ी की कीमत लगभग 15 लाख रुपये बताई जा रही है। ये सभी 2024-25 मॉडल की गाड़ियां अमलेश्वर बटालियन में खड़ी हैं और कम से कम छह माह तक निष्क्रिय रहने की संभावना है, क्योंकि वर्तमान ऑपरेटर एबीपी कंपनी का अनुबंध जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। फरवरी तक नई कंपनी को काम सौंपने की तैयारी है।
किन कंपनियों की दावेदारी
नए टेंडर में जीवीके, सम्मान फाउंडेशन, कैम्प, बीवॉयजी, विजन प्लस, जय अंबे और एबीपी कंपनी शामिल हुई हैं। माना जा रहा है कि जीवीके या जय अंबे कंपनी को ठेका मिल सकता है, क्योंकि दोनों पहले छत्तीसगढ़ में 108 एंबुलेंस सेवा चला चुकी हैं। वहीं, कैम्प वर्तमान में नि:शुल्क शव वाहन सेवा संचालित कर रही है।
एमपी की तर्ज पर सोसायटी को मौका
मध्यप्रदेश में भी डायल-112 का संचालन एक सोसायटी को दिया गया है। एमपी में जिस कंपनी के पास ठेका है, वही गाड़ियों की खरीदी भी करती है। इसी मॉडल को अब छत्तीसगढ़ में भी लागू करने की चर्चा तेज है।
टेंडर की नई शर्तें
• सोसायटी को भी भागीदारी की अनुमति, पात्रता अभी स्पष्ट नहीं
• लगातार 3 वर्षों का बैक-टू-बैक अनुभव अनिवार्य
• डायल-112 या इमरजेंसी वाहन का सीधा उल्लेख नहीं
• पिछले 3 वर्षों में फील्ड सर्विस में 75 करोड़ रुपये का टर्नओवर जरूरी
• आईटी, ट्रांसपोर्टिंग व अन्य कार्यों का विभाजन अलग-अलग कंपनियों के बीच किया जाएगा
29 अक्टूबर टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि है और दो महीने में प्रक्रिया पूरी कर ठेका किसी एक कंपनी को देने की तैयारी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह बदलाव सेवा सुधार की दिशा में कदम साबित होता है या फिर नए विवाद की शुरुआत।



