महुआ और मिलेट्स को मिली वैश्विक पहचान: वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में छत्तीसगढ़ के जशप्योर ने लहराया परचम

रायपुर, 29 सितम्बर 2025। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले का ब्रांड जशप्योर केंद्र में रहा। आदिवासी महिलाओं की मेहनत और नवाचार से तैयार महुआ और मिलेट्स आधारित उत्पादों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनाई।
कभी सिर्फ शराब से जोड़े जाने वाले महुआ ने अब पौष्टिक खाद्य सामग्री के रूप में अपनी जगह बनाई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल और दूरदर्शी सोच से महुआ को पोषण और स्वास्थ्य से जोड़ने का प्रयास रंग ला रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि “महुआ और मिलेट्स जैसे पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक विज्ञान और नवाचार से जोड़कर हम न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहे हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान भी बढ़ा रहे हैं।”
इस प्रदर्शनी में महुआ नेक्टर को विशेष सराहना मिली, जिसे दूध, मिठाई और पेय पदार्थों में प्राकृतिक स्वीटनर के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा महुआ आधारित च्यवनप्राश (बिना शक्कर), महुआ टी, कुकीज और एनर्जी स्नैक्स ने आगंतुकों का ध्यान खींचा। वहीं, कुटकी, कोदो और बकव्हीट जैसे पारंपरिक मिलेट से बने 15 से अधिक वैरायटी के पास्ता, स्नैक्स और बेकरी उत्पादों को भविष्य का सुपरफूड माना गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी जशप्योर की सराहना की। एस्वातिनी (Eswatini) देश के कृषि मंत्री और कृषि निदेशक ने महुआ नेक्टर का स्वाद चखकर इसकी गुणवत्ता और पोषण मूल्य की तारीफ की।
जशप्योर के पीछे काम कर रहीं जशपुर की आदिवासी महिला उद्यमी, जय जंगल एफपीसी के माध्यम से वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और फूड-ग्रेड हार्वेस्टिंग द्वारा महुआ और मिलेट्स को सुपरफूड में बदल रही हैं।
इस सफलता ने साबित किया कि परंपरा, मेहनत और नवाचार के साथ मुख्यमंत्री की सोच मिलकर छत्तीसगढ़ की खाद्य संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला सकती है। जशप्योर अब महुआ और मिलेट्स को शराब की पहचान से हटाकर पोषण और खाद्य की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रतीक बन चुका है।



