गुढ़ियारी में गोविंदाओं का जोश, भक्ति और संगीत का संगम: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में विशाल दही हांडी उत्सव धूमधाम से संपन्न

रायपुर, 18 अगस्त 2025 छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रविवार को ऐतिहासिक विशाल दही हांडी उत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ। सार्वजनिक दही हांडी उत्सव समिति एवं हनुमान मंदिर ट्रस्ट के इस आयोजन में हजारों दर्शकों की भीड़ उमड़ी। गोविंदा टोलियों के जोश और भक्तिमय माहौल ने पूरे मैदान को कृष्णमय बना दिया।
आयोजन के दौरान दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर महंत राजीव दास लोचन ने संयोजक बसंत अग्रवाल को ‘धर्म वीर’ की उपाधि से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अग्रवाल को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक उत्सव छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत बनाते हैं।

गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरुण साव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव सहित कई मंत्री और वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह उत्सव प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाई प्रदान करता है।
संगीत और भक्ति का अनूठा संगम
मनोरंजन के विशेष प्रबंध ने उत्सव को और भी भव्य बना दिया। इंडियन आइडल विजेता पवनदीप राजन ने अपनी सुरीली आवाज से मैदान को झूमने पर मजबूर कर दिया, वहीं भजन गायिका गीता बेन रबारी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया। छत्तीसगढ़ी गायिकाएं पूनम-दिव्या तिवारी ने भी कार्यक्रम में रंग भरे। इसके अलावा ओडिशा के कलाकारों का पारंपरिक ‘घंटा बाजा’ और ग्रीस लगे खंभे पर चढ़ने की प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही।
गोविंदा टोलियों का रोमांच
शाम से शुरू हुई दही-हांडी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्यप्रदेश और झारखंड से आई टोलियों ने हिस्सा लिया। ‘गोविंदा आला रे’ के नारों के बीच मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने का रोमांच देखते ही बन रहा था। कड़े मुकाबले में सोंझरा समिति ने पहला पुरस्कार जीता, जबकि दूसरा और तीसरा पुरस्कार सामुहिक समिति के नाम रहा। अन्य टोलियों को भी सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
संयोजक ने जताया आभार
आयोजन की सफलता पर संयोजक बसंत अग्रवाल ने कहा, “एक छोटे से मोहल्ले से शुरू हुआ यह उत्सव आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री और अतिथियों की उपस्थिति ने हमारा मान बढ़ाया है।”
सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम के बीच देर रात तक चले इस उत्सव ने धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संदेश दिया।



