छत्तीसगढ़
Trending

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की राज्य सरकार को कड़ी फटकार: बिलासपुर एयरपोर्ट पर 7 साल से लटक रहा विकास, नाइट लैंडिंग, 4C एयरपोर्ट और सेना से जमीन वापसी जैसे अहम मुद्दों पर 5 महीने से नहीं हुई कोई प्रगति, कोर्ट ने पूछा– सरकार साफ-साफ बताए चाहती भी है एयरपोर्ट या नहीं?

बिलासपुर, 7 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर में एयरपोर्ट विकास कार्यों में हो रही भारी देरी को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार यह बताए कि वह बिलासपुर में एक सर्वसुविधायुक्त एयरपोर्ट बनाना चाहती भी है या नहीं।

खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार कई मौकों पर बिलासपुर में एयरपोर्ट और हवाई सुविधा देने के दावे करती रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर प्रगति बेहद धीमी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब यह मामला हाई कोर्ट की मॉनिटरिंग में है, तब भी इस तरह की देरी हैरान करने वाली है।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई 29 नवंबर 2024 को हुई थी। तब हाई कोर्ट को यह आश्वासन दिया गया था कि सभी विकास कार्य समय पर पूरे किए जाएंगे। इस आश्वासन के आधार पर अगली सुनवाई की तिथि 7 अप्रैल तय की गई थी। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने आज बताया कि इस दौरान किसी भी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि नाइट लैंडिंग के लिए डीवीओआर मशीन मार्च तक बिलासपुर पहुंचनी थी। उसका कुछ हिस्सा तो पहुंच चुका है और बाकी रास्ते में है, लेकिन उसे स्थापित करने के लिए जिस तीन कमरों वाले भवन का निर्माण होना था, वह काम आज तक शुरू नहीं हुआ है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से अधिवक्ता अनुमेह श्रीवास्तव ने खंडपीठ को जानकारी दी कि मशीन के सभी हिस्से अप्रैल अंत तक बिलासपुर पहुंच जाएंगे। हालांकि भवन के सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य अभी तक शुरू न होने के कारण मशीन की स्थापना तुरंत संभव नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को यह भी बताया कि सेना से ज़मीन वापसी के लिए रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच सहमति हो चुकी है, फिर भी एयरपोर्ट प्रबंधन के पक्ष में जमीन का हस्तांतरण नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा ने जानकारी दी कि इसके लिए आवश्यक राशि राज्य सरकार द्वारा अब तक जमा नहीं की गई है, जिसके कारण प्रक्रिया अटकी हुई है।

इसके अलावा 4C श्रेणी का एयरपोर्ट बनाने के लिए आवश्यक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अब तक तैयार नहीं की गई है, जबकि राज्य सरकार ने नवंबर 2024 में इसे तैयार करने का शपथ पत्र दिया था।

इन तमाम देरी पर खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर से सवाल किया कि ऐसी स्थिति क्यों बनी है। जब राज्य सरकार की ओर से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया, तो मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि सबसे अधिक देरी राज्य सरकार की तरफ से हो रही है, और यह तब जब याचिका पिछले 7 वर्षों से लंबित है।

खंडपीठ ने कहा कि बिलासपुर की जनता वर्षों से एयरपोर्ट की मांग कर रही है और कोर्ट खुद इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है, फिर भी राज्य सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही।

सुनवाई के बाद खंडपीठ ने आदेश में निर्देश दिया कि राज्य के मुख्य सचिव नाइट लैंडिंग सुविधा, सेना से जमीन वापसी और 4C एयरपोर्ट के लिए उठाए गए कदमों से संबंधित विस्तृत जानकारी दो सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के रूप में प्रस्तुत करें।

मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की गई है।

IMG 20250811 172353
Manish Tiwari

Show More

Related Articles

Back to top button