दुर्ग में बिना लाइसेंस बाइक चलाकर ली जान: बेटे को 5 साल जेल, बाइक देने वाले पिता को भी 3 महीने की सजा

रायपुर, 2 नवंबर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सड़क दुर्घटना के एक मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए बाइक चलाने वाले बेटे के साथ उसे वाहन देने वाले पिता को भी दोषी ठहराया है। कोर्ट ने बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के मोटरसाइकिल चलाकर जानलेवा हादसा करने वाले बेटे को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, जबकि पिता को 3 महीने की जेल और 5 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। इस फैसले को वाहन मालिकों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी माना जा रहा है।
दुर्ग पुलिस के अनुसार, घटना 4 अगस्त 2025 की रात करीब 8:30 बजे सुपेला थाना क्षेत्र की स्मृतिनगर पुलिस चौकी अंतर्गत इंदु आईटी स्कूल, कोहका के पास हुई थी। तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने एक एक्टिवा को जोरदार टक्कर मार दी थी। हादसे में एक्टिवा चालक शादान अली की मौत हो गई थी, जबकि पीछे बैठे उत्तम पांडेय गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि मोटरसाइकिल क्रमांक CG 07 CW-2768 को मोहित कुमार बघेल चला रहा था। उसने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए एक्टिवा क्रमांक CG 19 A-2771 को टक्कर मारी थी। हादसे के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
बिना लाइसेंस बेटे को दी थी बाइक
विवेचना के दौरान पुलिस ने मोटरसाइकिल चालक के दस्तावेजों की जांच की। इसमें पता चला कि दुर्घटना के समय मोहित कुमार बघेल के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद उसके पिता मोहन लाल बघेल ने उसे मोटरसाइकिल चलाने के लिए दी थी। इसके बाद पुलिस ने बेटे के साथ पिता को भी आरोपी बनाया और जांच पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया।
बेटे को 5 साल, पिता को 3 महीने की सजा
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 31 अक्टूबर 2026 को दुर्ग सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाया। न्यायालय ने मोहित कुमार बघेल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 105(2) के तहत 5 साल का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 110(2) के तहत 3 साल का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
इसके अलावा मोटरयान अधिनियम की धारा 184 के तहत 10 महीने का साधारण कारावास और 3 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 3/181 के तहत 3 महीने का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया गया।
वहीं, पिता मोहन लाल बघेल को मोटरयान अधिनियम की धारा 5/180 के तहत 3 महीने का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं भरने पर 7 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभिभावकों के लिए पुलिस की चेतावनी
इस मामले में राज्य की ओर से लोक अभियोजक द्रोण ठाकुर ने पैरवी की। दुर्ग पुलिस ने फैसले के बाद वाहन मालिकों और अभिभावकों से अपील की है कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस किसी को भी वाहन चलाने की अनुमति न दें।
पुलिस ने विशेष रूप से माता-पिता को चेताया है कि नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल या अन्य वाहन चलाने के लिए न दें। यातायात नियमों की अनदेखी से न केवल चालक, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि बिना लाइसेंस वाहन चलाने वाले के साथ उसे वाहन उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।



