
बिलासपुर, 30 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में बन रहा एक रोड ओवरब्रिज (ROB) अपनी अजीबोगरीब डिजाइन को लेकर सवालों के घेरे में है। बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत जयरामनगर-गतौरा रेलवे स्टेशनों के बीच परसदा फाटक पर निर्माणाधीन इस ओवरब्रिज में रेलवे ट्रैक पार करने के बाद वाहनों को लगभग 180 डिग्री का हेयरपिन यू-टर्न लेना पड़ेगा। इस डिजाइन के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ओवरब्रिज की ड्रोन तस्वीरें सामने आने के बाद इसकी डिजाइन और इंजीनियरिंग के मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों को आशंका है कि पुल का संकरा और घुमावदार रास्ता भविष्य में वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
ब्लाइंड स्पॉट बनेगा दुर्घटना की वजह?
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर मंडल के अंतर्गत जयरामनगर-गतौरा स्टेशनों के बीच समपार-361 यानी परसदा फाटक पर नए रोड ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे ने भारी-भरकम क्रेन की मदद से गर्डर लॉन्च कर निर्माण कार्य में तेजी लाने की बात कही है। हालांकि, सामने आई तस्वीरों ने ब्रिज की डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तैयार नक्शे के अनुसार, रेलवे ट्रैक पार करने के बाद वाहनों को सीधे रास्ते के बजाय करीब 180 डिग्री के तीखे मोड़ से गुजरना होगा। इस तरह का संकरा घुमाव खतरनाक ब्लाइंड स्पॉट बन सकता है। ऐसी स्थिति में विपरीत दिशा से आने वाले वाहन चालकों को सामने से आ रहे वाहनों का समय रहते पता नहीं चल पाएगा।
इससे तेज रफ्तार वाहनों के बीच आमने-सामने की टक्कर और गंभीर सड़क हादसों की आशंका बनी रह सकती है। खासकर रात के समय या कम दृश्यता की स्थिति में यह मोड़ अधिक जोखिम भरा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञ ने बताई ओवरब्रिज की डिजाइन संबंधी खामियां
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता (सेतु) एस.के. जैन के मुताबिक, किसी भी दो लेन वाले रोड ओवरब्रिज की चौड़ाई कम से कम 12 मीटर होनी चाहिए। इसमें लगभग 7.5 मीटर का कैरिज-वे शामिल होना चाहिए, ताकि वाहनों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से हो सके।
विशेषज्ञ के अनुसार, ब्रिज से नीचे उतरने के बाद वाहनों को कुछ दूरी तक सीधी सड़क मिलनी चाहिए। इससे वाहन चालक आसानी से गति नियंत्रित कर सकते हैं और आगे की सड़क की स्थिति को समझ सकते हैं।
यदि किसी कारण से मोड़ देना जरूरी हो, तो वाहन की संभावित गति के अनुसार पर्याप्त रेडियस (मोड़ की त्रिज्या) और सुपर-एलिवेशन (सड़क का निर्धारित अनुप्रस्थ ढलान) देना आवश्यक है। इससे वाहन मोड़ पर संतुलन बनाए रख सकते हैं और दुर्घटनाओं का जोखिम कम होता है।
जगह की कमी थी तो बदलना चाहिए था डिजाइन
एस.के. जैन के मुताबिक, यदि निर्माण स्थल पर पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण निर्धारित रेडियस देना संभव नहीं था, तो रेलवे को डिजाइन में बदलाव कर वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए था। जरूरत पड़ने पर स्थल चयन की समीक्षा भी की जानी चाहिए थी।
निर्माणाधीन ओवरब्रिज की मौजूदा डिजाइन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतिम निर्माण में सड़क की चौड़ाई, मोड़ की त्रिज्या और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक मानकों का कितना ध्यान रखा जाता है।
फिलहाल, इस ओवरब्रिज की डिजाइन को लेकर उठी चिंताओं के बीच निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की ओर से तकनीकी स्थिति पर स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। सुरक्षित यातायात के लिए जरूरी है कि पुल का निर्माण इस तरह किया जाए, जिससे वाहन चालकों को पर्याप्त दृश्यता मिले और तीखे मोड़ के कारण दुर्घटनाओं का खतरा न बढ़े।



