धूप में बिहान की महिलाओं का 3 किमी पैदल मार्च: बालोद कलेक्ट्रेट पहुंची पर बाहर रोका, कलेक्टर मिलने तक नहीं आए

छत्तीसगढ़ के बालोद में अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर बिहान समूह की महिलाओं ने सोमवार को पैदल मार्च निकाला। तेज धूप में महिलाएं पैदल चलते हुए अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर तक पहुंची, लेकिन उन्हें गेट के बाहर ही रोक दिया गया। महिलाओं का प्रदर्शन देख प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने के लिए पहुंचे। उन्होंने पांच महिलाओं को कलेक्टर से मिलवाने की बात कही, पर वह कलेक्टर को बुलवाने के लिए अड़ी रहीं। घंटों तक हंगामा चलता रहा, पर कलेक्टर मिलने नहीं आए।
दरअसल, बिहन समूह की महिलाएं अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके तहत महिलाएं सोमवार को कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए निकलीं। इस दौरान वह घोटिया चौक पर एकत्र हुईं और फिर वहां से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट तक पहुंच गई। महिलाओं की भीड़ देख उन्हें गेट के बाहर ही रोक दिया गया। इसके बाद महिलाओं ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने पहुंचे, पर महिलाएं कलेक्टर से मिलने पर अड़ी रहीं।
प्रशासन पहुंचता है तो हम रहते हैं अडिग
प्रदर्शनकारी महेश्वरी ठाकुर ने कहा कि जब जिला प्रशासन के आला अधिकारी हमारे गांव पहुंचते हैं तो हम गौठानों में अडिग रहते हैं। उनका पूरा सहयोग और समर्थन करते हैं। आज हम जब प्रशासन के दर पर पहुंचे हैं तो हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है। हम लगातार मांग कर रहे हैं कि हमें कलेक्टर से मिलना है, लेकिन मिलने नहीं दिया जा रहा है। आखिर हम भी तो इसी सरकारी तंत्र का एक अंग हैं। हम ना कोई आतंकवादी हैं और ना ही कोई विरोधाभास करने वाले व्यक्ति बस हम अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे हैं।
बिहान समूह की महिलाओं की मांग
- मानदेय में वृद्धि
- नियुक्ति प्रमाण पत्र प्रदान करें
- प्रतिमाह मानदेय मिले
- नियमितीकरण
- निवास से कार्य स्थल आने जाने के लिए भत्ता
शासन की योजनाओं से जुड़कर कर्जे में आ गए
बिहान समूह की वरिष्ठ कार्यकर्ता माहेश्वरी ठाकुर ने कहा कि जो भी काम शासन से मिलता है उसे हम बखूबी निभाते हैं, लेकिन जितना ध्यान सरकार को देना चाहिए उतना नहीं दे पाती है। उन्होंने कहा कि, काफी लंबे समय से हम शासन की योजनाओं से जुड़कर कार्य कर रहे हैं, लेकिन स्थिति यह हो गई है कि हम कर्ज में आ गए हैं। ना तो यात्रा भत्ता दिया जाता है और ना ही कुछ और। जब मंत्री विधायक आते हैं तो हमें सामने खड़ा कर दिया जाता है, लेकिन हमारे काम और हमारे पीछे की सच्चाई से शासन-प्रशासन दोनों अवगत होना ही नहीं चाहते।



