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गांवों के ज्ञान से खिलेगी हर्बल समृद्धि : बैगा-गुनिया की विरासत से हर खेत बनेगा औषधीय शक्ति केंद्र, छत्तीसगढ़ उठाएगा आरोग्य क्रांति की मशाल

रायपुर, 04 मई 2025 । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों के लिए औषधि पौधों का प्लांटेशन करना है। इसका बेचना बहुत ही फायदेमंद होगा। आज किसान धान की खेती करते हैं। एक एकड़ में धान से आय प्राप्त होती है, औषधि पौधे जब खेतों में लगाएंगे तो एक एकड़ में धान से कई गुना आय प्राप्त होगी। साय शनिवार को यहाँ छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आहूत पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह बोर्ड हमारी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में बनाया था। इसका उद्देश्य है कि वनवासी क्षेत्रों के वैद्यराज जो आयुर्वेद का ज्ञान रखते हैं, उनका संवर्धन और संरक्षण करना। साथ ही औषधि और सुगंधित पौधों का विकास और खरीदी-बिक्री सुनिश्चित करना।

बोर्ड अध्यक्ष के रूप में विकास मरकाम इस उद्देश्य की पूर्ति करेंगे। जब बड़े अस्पताल जवाब दे देते हैं तब लोग ग्राम्य वैद्यों की ओर जाते हैं। बोर्ड और फॉरेस्ट विभाग की ओर से सब्सिडी और सुविधाएं दी जाएंगी।

बोर्ड बस्तर और सरगुजा संभाग में जागरूकता शिविर लगाएगा और ग्रामीण किसानों को औषधीय पौधों के लाभ बताएगा। छत्तीसगढ़ में भरपूर वन औषधि पादप हैं और यह प्रदेश हर्बल स्टेट के रूप में जाना जाएगा।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण के मामले में छत्तीसगढ़ सबसे आगे है और संग्राहकों को ₹5500 प्रति मानक बोरा दिया जा रहा है। प्रदेश में 67 प्रकार की लघु वन उपज संगृहीत की जा रही है। यह परंपरा और संसाधनों का संरक्षण हमें आगे ले जाएगा।

मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि विकास मरकाम एक जमीन से जुड़े कार्यकर्ता हैं और उनके नेतृत्व में गुनिया-बैगा का ज्ञान संरक्षित होगा। उनका डेटाबेस तैयार कर समाज के स्वास्थ्य और अनुसंधान में उपयोग किया जाएगा। यह एक महती जिम्मेदारी है।

अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार परंपरागत हर्बल मेडिसिन को बढ़ावा दे रही है। प्राकृतिक चिकित्सा से कई बीमारियां ठीक होती हैं जो एलोपैथिक दवाओं से नहीं हो पातीं।

अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि विज्ञान और परंपरा का संवाद जरूरी है। अनुभव आधारित चिकित्सा, जीवनशैली संतुलन, और हेल्थ सिस्टम के रूप में परंपरा का विकास जरूरी है।

उनका प्रयास रहेगा कि ‘मोर मेड़ मोर पेड़’ के तहत पौधारोपण हो और वनस्पति संरक्षण किया जाए।

इस दौरान कार्यक्रम में टंकराम वर्मा, विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, संजय श्रीवास्तव, राजीव अग्रवाल, अमरजीत सिंह छाबड़ा, मोना सेन, डॉ सलीम राज, सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।


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Manish Tiwari

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