छत्तीसगढ़

बस्तर दशहरा: आयोजन समिति ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दिया न्योता, मां दंतेश्वरी की तस्वीर की सौगात

जगदलपुर, 20 सितंबर 2025 जगप्रसिद्ध बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में इस बार खास मेहमान के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हो सकते हैं। आयोजन समिति ने उन्हें औपचारिक आमंत्रण दिया है।

बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप के नेतृत्व में मांझी-चालकी एवं मेबरिन का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा और अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार का निमंत्रण पत्र सौंपा गया और मां दंतेश्वरी की तस्वीर भेंट की गई।

क्यों है खास बस्तर दशहरा

भारत में जहां दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक है, वहीं छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा पूरी तरह अलग और रहस्यमयी परंपरा वाला पर्व है। यह न तो रावण दहन से जुड़ा है और न ही रामलीला से, बल्कि यह मां दंतेश्वरी की आराधना, तांत्रिक विधियों और जनजातीय परंपराओं से जुड़ा विश्व का सबसे लंबा दशहरा पर्व है, जो लगातार 75 दिनों तक चलता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मान्यता है कि 13वीं शताब्दी में बस्तर के राजा पुरुषोत्तम देव ने माता दंतेश्वरी की आज्ञा से इस पर्व की शुरुआत की थी। तब से यह उत्सव जनजातीय संस्कृति और गहरे आध्यात्मिक रहस्यों का प्रतीक बना हुआ है।

75 दिन, 13 अनुष्ठान

हरेली अमावस्या से शुरू होकर यह पर्व 13 बड़े अनुष्ठानों के साथ संपन्न होता है। इनमें पट जात्रा, देवी का निवेदन, काछिन गादी, रथारोहण, मावली परघाव और बहराम देव की विदाई प्रमुख हैं। खासकर मावली यात्रा सबसे रहस्यमयी होती है, जब देवी की प्रतिमा को रात के अंधेरे में जंगल से लाया जाता है।

जनजातीय पुजारियों की अनोखी परंपरा

इस दशहरा में ब्राह्मणों की जगह जनजातीय पुजारी—गुड़िया, सिरहा, मांझी— पूजन-अनुष्ठान कराते हैं। रात्रिकालीन गुप्त तांत्रिक अनुष्ठानों में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित होता है।

“मावली” देवी का महत्व

मां दंतेश्वरी को कुलदेवी मानने के साथ-साथ इस पर्व में मावली देवी की भी विशेष भूमिका है। उन्हें जंगल से लाकर दंतेश्वरी देवी के साथ विराजमान कराया जाता है, जो बस्तर में प्रकृति, जंगल और देवी के गहरे संबंध का प्रतीक है।

👉 इस बार बस्तरवासी उत्सुक हैं कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस अद्वितीय परंपरा और रहस्यमयी दशहरा के साक्षी बनेंगे।

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Manish Tiwari

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