विशेष लेख : सरकारी योजनाओं से संवर रही सरगुजा की तस्वीर, किसी को रोजगार तो किसी को पढ़ाई में मिल रहा सहारा

रायपुर, 16 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लोगों को आर्थिक आत्मनिर्भरता, शिक्षा और स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से बिजली खर्च में राहत मिल रही है, छात्रवृत्ति से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिल रही है, जबकि स्वरोजगार योजनाएं महिलाओं और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संचालित केंद्रीय योजनाओं और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), छात्रवृत्ति योजनाएं, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना से लाभान्वित हितग्राहियों के अनुभव सरगुजा में हो रहे बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं।
पीएम सूर्य घर योजना से पंकज साहू को मिली 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी
अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी पंकज साहू ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। उनका कहना है कि पहले गर्मी के दिनों में घर का मासिक बिजली बिल चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता था। बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सौर ऊर्जा प्रणाली लगवाई।
पंकज साहू को सोलर सिस्टम स्थापित कराने के लिए केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।
सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद उनके बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है। पंकज के अनुसार, कई बार घर की जरूरत से अधिक बिजली उत्पादित होने पर उसे ग्रिड में भेजा जाता है, जिससे उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है। उनके अनुभव के अनुसार, सौर ऊर्जा घरेलू खर्च कम करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में भी सहायक है।
छात्रवृत्ति से कृष्णा यादव की उच्च शिक्षा को मिल रहा सहारा
अम्बिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी कृष्णा यादव के लिए छात्रवृत्ति पढ़ाई जारी रखने में मददगार साबित हो रही है। उनके पिता कृषि कार्य करते हैं। सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ कॉलेज की फीस, किताबें, कॉपियां और आवागमन का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है।
ऐसे में छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता कृष्णा को पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और कॉलेज आने-जाने के खर्च में मदद कर रही है। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में सहयोग मिल रहा है।
कृष्णा की कहानी बताती है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। इससे उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य में बेहतर अवसर हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने का संबल मिलता है।
पीएमईजीपी से हर्षिता खत्री ने स्थापित किया फर्नीचर उद्योग
स्वरोजगार के क्षेत्र में अम्बिकापुर की हर्षिता खत्री ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है। वह श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं। उनके पति दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं।
परिवार लंबे समय से अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता था, लेकिन पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं होने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से योजना की जानकारी मिलने के बाद हर्षिता ने ऋण के लिए आवेदन किया। ऋण स्वीकृत होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई स्थापित करने का सपना साकार हुआ।
इस उद्योग में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। इकाई की स्थापना से परिवार को स्वरोजगार मिला है और इससे जुड़े कर्मचारियों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है।
हर्षिता खत्री का अनुभव दर्शाता है कि वित्तीय सहायता और उचित मार्गदर्शन मिलने पर इच्छुक उद्यमी अपने व्यावसायिक विचारों को उद्योग में बदल सकते हैं। ऐसे उद्यम स्थानीय उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराते हैं।
सक्षम योजना से इंदु लता ने शुरू किया डेयरी व्यवसाय, चार बेटियों की पढ़ाई को मिला संबल
अम्बिकापुर की इंदु लता गुप्ता के जीवन में छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना ने स्वरोजगार की राह खोलने में मदद की। पति के निधन के बाद चार बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। परिवार के पास नियमित आय का पर्याप्त साधन नहीं था, जिससे घरेलू जरूरतों के साथ बेटियों की पढ़ाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से उन्हें सक्षम योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण मिलने पर उन्होंने अपनी ओर से भी राशि मिलाकर दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय शुरू किया। अब दूध की बिक्री उनके परिवार की आजीविका का सहारा बन रही है।
इंदु लता की एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूल में अध्ययनरत हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटियों की शिक्षा जारी रखना उनके संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने के प्रयास को दर्शाता है।
सक्षम योजना के तहत मिले ऋण से शुरू हुआ डेयरी व्यवसाय इंदु लता को परिवार की जरूरतें पूरी करने और बेटियों के भविष्य को संवारने में मदद कर रहा है।
महतारी वंदन योजना से सरिता तिग्गा के सिलाई व्यवसाय को मिला सहारा
सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी सरिता तिग्गा अपने सिलाई कार्य के माध्यम से परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे रही हैं। उनके पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं और परिवार में तीन बच्चे हैं। सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए उन्हें अतिरिक्त आय की आवश्यकता रहती है।
सरिता घर पर सिलाई का काम करती हैं। इस काम को जारी रखने के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदनी पड़ती है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि उनके लिए मददगार साबित हो रही है। वह इस राशि का उपयोग सिलाई कार्य से जुड़ी आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं।
मजदूरी से होने वाली आय के साथ सिलाई से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है। सरिता का अनुभव बताता है कि नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को अपने हुनर के आधार पर छोटे व्यवसाय को जारी रखने और परिवार की आय में योगदान देने का अवसर प्रदान कर सकती है।
योजनाओं से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे परिवार
सरगुजा जिले के इन पांच हितग्राहियों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन सभी की कहानियों में सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग का उपयोग कर जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास दिखाई देता है। पंकज साहू ने सौर ऊर्जा अपनाकर बिजली खर्च कम किया, कृष्णा यादव को छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिली, हर्षिता खत्री ने फर्नीचर उद्योग स्थापित किया, इंदु लता गुप्ता ने डेयरी व्यवसाय के माध्यम से चार बेटियों की शिक्षा को सहारा दिया और सरिता तिग्गा ने सिलाई कार्य को आगे बढ़ाने के लिए महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली सहायता लोगों को आर्थिक चुनौतियों से निपटने, अपने कौशल का उपयोग करने और आय के नए साधन विकसित करने में सहयोग प्रदान कर रही है।
सरगुजा के इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना भी है। शिक्षा, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में मिलने वाला सहयोग परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रहा है।


