छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती पर रोक: दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं मिलने पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर, 9 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में भर्ती परीक्षा पर भी रोक लगा दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश कृष्णराम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रूंगटा ने दलील दी कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को इसका लाभ नहीं दिया गया है।
आरक्षण व्यवस्था को दी गई चुनौती
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग और समाज कल्याण विभाग के दिशा-निर्देशों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। इससे वे भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। याचिका में इसे दिव्यांग अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
याचिका में कहा गया है कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांगों की अन्य श्रेणियों के लिए आरक्षित पदों का प्रावधान किया गया है, लेकिन पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को इससे वंचित रखा गया है। इसी आधार पर भर्ती की शर्तों और आरक्षण रोस्टर को चुनौती दी गई है।
राज्य शासन से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही भर्ती परीक्षा पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
हालांकि, यह रोक भर्ती प्रक्रिया के किन पदों या किन चरणों पर लागू होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी हाई कोर्ट के विस्तृत आदेश से ही मिल सकेगी। अब इस मामले में राज्य शासन के जवाब और कोर्ट के आगामी फैसले पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।


