
रायपुर, 4 अक्टूबर। केंद्रीय जेल रायपुर में हाल के विवादित घटनाक्रमों के बीच शनिवार को जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने करीब चार घंटे तक औचक निरीक्षण किया। डीसीपी क्राइम स्मृतिक राजनाला, डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल और एडीएम उमाशंकर बांधे के नेतृत्व में करीब 50 जवानों की टीम ने सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक जेल परिसर की सघन जांच की।
निरीक्षण के दौरान जेल की अलग-अलग बैरकों की बारीकी से तलाशी ली गई। अभियान में एसीसीयू और सेंट्रल जोन के थानों की टीमें भी शामिल रहीं। महिला बैरक की जांच के लिए अलग टीम तैनात की गई। तलाशी के दौरान किसी भी तरह की प्रतिबंधित या आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों ने जेल प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
सोनवानी प्रकरण के बाद तीन प्रहरियों पर कार्रवाई
केंद्रीय जेल में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब सीजीपीएससी मामले में जेल में बंद टामन सोनवानी का आंबेडकर अस्पताल में स्वजन से बिना हथकड़ी बातचीत करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद जेल में निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
मामले में निगरानी में तैनात तीन प्रहरियों पर कार्रवाई की गई। संदीप कुमार माहेश्वरी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, जबकि नागेंद्र कुमार महतो और पवन कुमार लहरे के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनके संबंधित जिलों के अधिकारियों को पत्र भेजा गया था।
मंगोड़ी सेंटर में नशीला सामान मिलने से भी उठे सवाल
जेल के बाहर संचालित आस्था मंगोड़ी सेंटर में छापे के दौरान गांजा, नशीली गोलियां, तंबाकू, करीब 400 पैकेट गुटखा, दो मोबाइल फोन और करीब 70 से 72 हजार रुपये मिलने की जानकारी सामने आई थी। कार्रवाई के बाद से यह सेंटर बंद है।
हालांकि, जेल विभाग ने बरामद सामान और जेल के अंदर कथित नशीले पदार्थों की सप्लाई के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
कैदियों के वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप
इसी बीच सोशल मीडिया पर जेल से जुड़े कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए। इनमें कुछ कैदियों ने जेल प्रहरियों पर पैसे मांगने और रकम नहीं देने पर मारपीट करने के आरोप लगाए। कुछ कैदियों ने अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए।
इन वीडियो के वायरल होने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को अचानक जेल पहुंचकर पूरे परिसर का निरीक्षण किया।
करीब चार घंटे चले इस अभियान के दौरान अधिकारियों ने बैरकों, महिला बैरक और अन्य हिस्सों की जांच की। फिलहाल जांच में कोई प्रतिबंधित या आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद अधिकारियों ने जेल प्रबंधन को भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।



