आदेश नहीं माना तो कोर्ट हुआ सख्त: आबकारी कमिश्नर और अपर आयुक्त से पूछा—अवमानना की कार्रवाई क्यों न हो?

बिलासपुर, 04 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश का करीब नौ महीने तक पालन नहीं करने पर कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पीएस एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पीएल साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों से पूछा है कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। दोनों अधिकारियों को तीन सप्ताह में जवाब पेश करने का निर्देश दिया गया है।
मामला जांजगीर-चांपा आबकारी विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर कार्यरत मुकेश कुमार शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने आबकारी उपनिरीक्षक पद की विभागीय पदोन्नति परीक्षा में हिस्सा लिया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उनके सेवा अभिलेख में वर्ष 2017, 2018 और 2019 की प्रतिकूल प्रविष्टियों के आधार पर 15 अंक काट दिए गए थे। इसके चलते वे पदोन्नति की दौड़ से बाहर हो गए।
मुकेश कुमार शर्मा ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इन प्रविष्टियों को चुनौती दी थी। 16 दिसंबर 2025 को जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने मामले में आदेश पारित करते हुए कहा था कि संबंधित वर्षों की प्रतिकूल टिप्पणियां याचिकाकर्ता को पहले से बताए बिना दर्ज की गई थीं और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया।
कोर्ट ने इन प्रतिकूल प्रविष्टियों को हटाने का निर्देश देते हुए विभाग को उपलब्ध अन्य सेवा अभिलेखों के आधार पर याचिकाकर्ता के मामले पर दोबारा विचार कर 90 दिनों के भीतर नया आदेश पारित करने को कहा था।
90 दिन की समयसीमा बीती, फिर भी नहीं हुआ फैसला
हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित 90 दिनों की अवधि पूरी होने के बाद भी विभाग की ओर से आदेश का पालन नहीं किया गया। करीब नौ महीने बीतने के बाद मुकेश कुमार शर्मा ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि न्यायालय के आदेश का समय पर पालन नहीं होने से न केवल संबंधित व्यक्ति को न्याय मिलने में देरी होती है, बल्कि ऐसे मामलों के कारण अवमानना याचिकाओं का बोझ भी बढ़ता है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पीएस एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पीएल साहू को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे अवमानना की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।



