
बिलासपुर, 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के रिटायर्ड शासकीय कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 महीने के बकाया पेंशन एरियर का भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अवधि का लाभ पात्र पेंशनरों को दिया जाए और भुगतान की प्रक्रिया 120 दिनों के भीतर पूरी की जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने बस्तर निवासी 80 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधान पाठक ज्ञानदत्त मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 1 जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित पेंशन का वास्तविक वित्तीय लाभ 1 सितंबर 2008 से देने संबंधी राज्य शासन के परिपत्र और स्पष्टीकरण समान परिस्थितियों वाले पेंशनरों के साथ भेदभाव करते हैं। इसलिए अदालत ने इन आदेशों को उस सीमा तक निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश, दोनों राज्य अपने-अपने हिस्से की वित्तीय जिम्मेदारी निभाते हुए पात्र पेंशनरों को 32 महीने का एरियर निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समान परिस्थितियों में किसी भी पेंशनर के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
इस फैसले के बाद राज्य गठन के बाद सेवानिवृत्त हुए बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि हजारों पात्र पेंशनरों को अब वर्षों से लंबित बकाया राशि मिलने की उम्मीद है, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण वित्तीय राहत मिलेगी।



