रायपुर में ‘CBI-IPS’ का खौफ दिखाकर ठगी: 45 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रहे दुकानदार ने जमा पूंजी और जेवर बेचकर दिए 8.50 लाख

रायपुर, 5 अक्टूबर 2026
CBI-IPS अधिकारी बनकर 45 दिन तक डिजिटल अरेस्ट, मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर दुकानदार से 8.50 लाख की ठगी
रायपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। खमतराई थाना क्षेत्र के बजरंग नगर उरकुरा निवासी 64 वर्षीय किराना दुकानदार देवसिंह साहू को साइबर ठगों ने करीब 45 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर रखा। आरोपियों ने खुद को कभी CBI अधिकारी तो कभी IPS अफसर बताकर उनसे 8.50 लाख रुपए ठग लिए।
पुलिस के मुताबिक ठगी का सिलसिला 18 अगस्त को शुरू हुआ। सुबह करीब 9 बजे देवसिंह के मोबाइल पर एक महिला का फोन आया। उसने दावा किया कि उनके नाम से ICICI बैंक में खुले खाते के जरिए 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। इसके बाद महिला ने आदित्य नाम के व्यक्ति से उनकी बात कराई। उसने देवसिंह से परिवार, जमीन और बैंक खातों से जुड़ी निजी जानकारी हासिल की।
इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल और WhatsApp कॉल आने लगीं। एक व्यक्ति ने अपना नाम बलराज सिंह बताते हुए खुद को CBI अधिकारी बताया। कुछ समय बाद वीडियो कॉल पर प्रदीप सिंह नाम के व्यक्ति से बात कराई गई, जिसने खुद को IPS अधिकारी बताया। उसने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल भेजने और जांच में सहयोग नहीं करने पर परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कराने की धमकी दी।
ठगों ने देवसिंह को लगातार वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में रहने के लिए मजबूर कर दिया। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि मामला बेहद गंभीर है और किसी अन्य व्यक्ति को जानकारी देने पर उनके परिवार को मुश्किल में डाल दिया जाएगा। डर के कारण उन्होंने यह बात अपने बेटे-बेटी तक को नहीं बताई।
पैसे जमा कराने के नाम पर ठगी
आरोपियों ने इसके बाद देवसिंह से कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी रकम के मिलान के लिए बैंक खातों में पैसे जमा कराने होंगे। 4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच उन्होंने ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम ट्रांसफर की। अधिकांश ट्रांजेक्शन करीब एक-एक लाख रुपए के थे, जबकि एक बार 50 हजार रुपए भी भेजे गए।
धीरे-धीरे कुल रकम 8.50 लाख रुपए तक पहुंच गई। इसमें उनकी जमा पूंजी भी शामिल थी। बैंक में पैसे कम पड़ने पर उन्होंने सोने के जेवर बेचकर भी रकम जुटाई, लेकिन इसके बावजूद ठगों की मांग बंद नहीं हुई।
भाई ने बताया- सरकारी जांच नहीं, साइबर ठगी है
जब पैसों की मांग लगातार बढ़ती गई तो 3 अक्टूबर को देवसिंह ने अपने छोटे भाई सुंदर लाल साहू को पूरी घटना बताई। बातचीत और घटनाक्रम समझने के बाद भाई ने उन्हें बताया कि यह किसी सरकारी एजेंसी की जांच नहीं, बल्कि साइबर ठगी का तरीका है।
इसके बाद देवसिंह ने बैंक स्टेटमेंट, ठगों से हुई चैट, मैसेज के स्क्रीनशॉट और रकम ट्रांसफर की रसीदें जुटाईं। 4 अक्टूबर को उन्होंने खमतराई थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
साइबर सेल की मदद से जांच शुरू
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। FIR में ठगी के दौरान इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल नंबरों के धारकों को संदिग्ध आरोपी बनाया गया है। पुलिस संबंधित मोबाइल नंबरों और उन बैंक खातों की भी जांच कर रही है, जिनमें पीड़ित ने रकम ट्रांसफर की थी।
पुलिस अब ट्रांजेक्शन की कड़ियों के जरिए ठगी के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह में कितने लोग शामिल हैं और ठगी की रकम आगे किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई।
साइबर ठगी का यह मामला एक बार फिर बताता है कि CBI, पुलिस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या जांच का डर दिखाकर पैसे मांगना ठगी का तरीका हो सकता है।



