स्टडी लीव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 24 महीने की छुट्टी ले चुके डॉक्टरों को नहीं मिलेगा 36 महीने का लाभ

बिलासपुर, 02 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पीजी मेडिकल की पढ़ाई के लिए स्टडी लीव बढ़ाने की मांग करने वाले 15 डॉक्टरों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस बीडी गुरु की अदालत ने स्पष्ट किया कि 3 मार्च 2025 के बाद स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने किए जाने का लाभ उन डॉक्टरों को नहीं मिलेगा, जिन्होंने इससे पहले ही 24 महीने की स्टडी लीव मंजूर कराकर उसका लाभ ले लिया था।
दरअसल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत डॉ. भूमिका देवांगन, डॉ. सरिता मौर्या, डॉ. सुनीति जेम्स समेत 15 डॉक्टरों ने पीजी मेडिकल की पढ़ाई के लिए विभाग से अनुमति और एनओसी प्राप्त की थी। इसके बाद उन्हें 24 महीने की स्टडी लीव मंजूर की गई थी।
बाद में 3 मार्च 2025 को राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम-2010 के नियम 44 में छूट देते हुए पीजी पाठ्यक्रम के लिए स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने कर दी। डॉक्टरों ने इस आदेश का हवाला देते हुए अपनी 24 महीने की स्टडी लीव को बढ़ाकर 36 महीने करने की मांग की।
शासन ने आवेदन किया खारिज
राज्य शासन ने डॉक्टरों की स्टडी लीव बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने शासन के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर कीं।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित डॉक्टरों की स्टडी लीव 3 मार्च 2025 के सरकारी आदेश से काफी पहले मंजूर हो चुकी थी। डॉक्टर 24 महीने की छुट्टी का लाभ भी ले चुके थे। इसलिए बाद में जारी आदेश को पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने किए जाने का यह अर्थ नहीं है कि पहले से 24 महीने की छुट्टी ले चुके प्रत्येक कर्मचारी की छुट्टी स्वतः 36 महीने हो जाएगी। इसके लिए सरकारी आदेश में स्पष्ट प्रावधान होना जरूरी था, जो इस मामले में नहीं है।
डॉ. मीनाक्षी सूद के मामले का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने डॉ. मीनाक्षी सूद के मामले का उदाहरण देते हुए समान लाभ देने की मांग की थी। विभाग ने 13 जून 2025 को उनके पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए तीन साल की पूरी अवधि को स्टडी लीव माना था।
हालांकि, वित्त विभाग की आपत्ति के बाद 31 जुलाई 2026 को यह आदेश रद्द कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि जो आदेश पहले ही रद्द हो चुका है, उसे आधार बनाकर दूसरे कर्मचारियों को समान लाभ देने की मांग नहीं की जा सकती।
क्या है स्टडी लीव?
स्टडी लीव यानी अध्ययन अवकाश सरकारी कर्मचारियों या नौकरी कर रहे डॉक्टरों को आगे की पढ़ाई अथवा निर्धारित प्रशिक्षण के लिए दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में इसका प्रावधान छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 44 में है।
3 मार्च 2025 के सरकारी आदेश के जरिए नियम 44 में छूट देते हुए नौकरी कर रहे डॉक्टरों के लिए पीजी की पढ़ाई हेतु स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने की गई थी। इसके साथ पढ़ाई पूरी करने के बाद 5 साल तक सेवा करने जैसी शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हुआ कि 3 मार्च 2025 के बाद लागू किया गया 36 महीने का प्रावधान पहले से स्वीकृत और पूरी की जा चुकी 24 महीने की स्टडी लीव पर स्वतः लागू नहीं होगा।



