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जैतूसाव मठ ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर विवाद, हाईकोर्ट बोला- प्रबंधन का अधिकार मिलने से पुजारी मालिक नहीं हो जाता

बिलासपुर, 23 सितम्बर 2026 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ठाकुर रामचंद्र जी स्वामी जैतूसाव मठ पब्लिक ट्रस्ट, रायपुर की संपत्तियों से जुड़े मामले में दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर या धार्मिक संपत्ति का प्रबंधन करने वाला पुजारी उस संपत्ति का स्वतंत्र मालिक नहीं बन जाता।

मामला ट्रस्ट की संपत्तियों के राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर का नाम मैनेजर या सर्वराकार के रूप में दर्ज किए जाने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता महंत राम आशीष दास ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए ट्रस्ट की संपत्तियों पर अपना अधिकार होने का दावा किया था।

महंत राम आशीष दास ने किया था दावा

याचिका महंत राम आशीष दास, निवासी जैतूसाव मठ, पुरानी बस्ती रायपुर ने दायर की थी। उन्होंने खुद को दिवंगत महंत राम भूषण दास का शिष्य बताते हुए वसीयत, गोद लेने के दस्तावेज और सर्वराकार के रूप में नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर ट्रस्ट की संपत्तियों पर अपना दावा पेश किया।

दिवंगत महंत राम भूषण दास की मृत्यु 16 नवंबर 2007 को हुई थी। वे ट्रस्ट के सर्वराकार थे।

कलेक्टर का नाम दर्ज करने की मांग

मामले में महेंद्र कुमार अग्रवाल ने ट्रस्ट की भरेंगा और भटगांव स्थित कृषि भूमि सहित अन्य संपत्तियों के राजस्व रिकॉर्ड से दिवंगत महंत का नाम हटाकर कलेक्टर का नाम दर्ज करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में की गई प्रविष्टि से याचिकाकर्ता के सर्वराकार पद या ट्रस्ट की संपत्ति पर वास्तविक अधिकार का अंतिम निर्धारण नहीं होता।

पांच साल से ज्यादा की देरी पर भी सवाल

कोर्ट ने यह भी पाया कि 28 अप्रैल 2016 के राजस्व मंडल के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका 28 अगस्त 2021 को दाखिल की गई, यानी इसमें पांच साल से अधिक की देरी हुई। याचिकाकर्ता देरी का संतोषजनक कारण भी नहीं बता सका।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति मामले में दिए गए सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार मिलने मात्र से पुजारी उस संपत्ति का स्वतंत्र मालिक नहीं हो जाता।

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर का नाम दर्ज होना ट्रस्ट के वास्तविक प्रबंधन या सर्वराकार पद के अधिकारों का अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। यदि याचिकाकर्ता सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी के सामने अपना अधिकार साबित करता है, तो राजस्व प्रविष्टियां उस निर्णय के अधीन रहेंगी।

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Manish Tiwari

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