विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की नई भोर, हुनर-शोध और तकनीकी शिक्षा से युवाओं के लिए खुल रहे रोजगार के नए रास्ते

रायपुर, 21 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अब केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रह गई है। राज्य में शिक्षा व्यवस्था को हुनर, शोध, तकनीक और रोजगार से जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना के अनुरूप युवाओं को केवल डिग्री देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
उच्च शिक्षा मिशन से कॉलेजों का उन्नयन
राज्य सरकार ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन’ की शुरुआत की है। इसके तहत महाविद्यालयों के ढांचागत और शैक्षणिक उन्नयन के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए जा रहे हैं। साथ ही पारदर्शी मॉनिटरिंग व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि सरकारी सहायता का सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे।
शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए 3,000 से अधिक छात्र संख्या वाले उत्कृष्ट कॉलेजों को चिन्हित कर 36 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं अध्यापन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राध्यापकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया को गति दी गई है। उद्योग जगत के अनुभवी और व्यावहारिक विशेषज्ञों को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में शैक्षणिक परिसरों से जोड़ने की पहल भी की जा रही है।
वनांचल के युवाओं तक पहुंच रही उच्च शिक्षा
उच्च शिक्षा को शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के आदिवासी और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में युवाओं को उनके अपने अंचल में गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं।
चार वर्षीय बी.एड. (ITEP) और बी.पी.एड. जैसे एकीकृत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर करियर विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उच्च शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर तैयार होने की उम्मीद है।
AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे नए विषयों पर फोकस
बदलते समय और रोजगार बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा में पारंपरिक विषयों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी और वेब डिजाइनिंग जैसे आधुनिक विषयों को भी प्रमुखता दी जा रही है।
स्वावित्तीय पाठ्यक्रम नीति के तहत स्थानीय और वैश्विक स्तर पर मांग वाले विषयों को शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को पढ़ाई के साथ ऐसे कौशल उपलब्ध कराना है, जिनका उपयोग वे आगे रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में कर सकें।
कृषि और स्थानीय उद्योगों से जुड़े पाठ्यक्रम
प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था और कृषि आधारित संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कई व्यावहारिक विषयों को भी उच्च शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इनमें रेशम कीट पालन, टसर टेक्नोलॉजी, फिशरीज, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, फ्लोरीकल्चर और हर्बल कल्टीवेशन जैसे विषय शामिल हैं।
इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध संभावनाओं के आधार पर युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के लिए तैयार करना है। इससे ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।
संस्थानों और उद्योगों के साथ MoU
व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योग जगत के साथ MoU किए गए हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, व्यावहारिक अनुभव और कैंपस प्लेसमेंट जैसी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा और उद्योग के बीच इस तरह का समन्वय विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक कार्यक्षेत्र की जरूरतों से परिचित कराने में मदद कर सकता है।
रिसर्च और कौशल विकास पर जोर
छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रिसर्च, कौशल विकास और उद्योग समन्वय है। आधुनिक तकनीक, स्थानीय जरूरतों और रोजगार बाजार को ध्यान में रखकर शिक्षा व्यवस्था को विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
उच्च शिक्षा के विस्तार, नए पाठ्यक्रमों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, उद्योगों से जुड़ाव और वनांचल तक संस्थानों की पहुंच के जरिए प्रदेश में ऐसा शिक्षा तंत्र विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें युवा डिग्री के साथ कौशल और व्यावहारिक अनुभव भी हासिल कर सकें।
इस तरह हुनर, शोध, तकनीक और स्वावलंबन को उच्च शिक्षा से जोड़ने की पहल छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आ रही है।



