महासमुंद जेल में कैदी की मौत पर हाईकोर्ट नाराज: शरीर पर 35 चोटें कैसे आईं, CS और DGP को 31 अगस्त तक देना होगा जवाब

बिलासपुर, 20 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महासमुंद जिला जेल में न्यायिक अभिरक्षा के दौरान कैदी की मौत के मामले को गंभीरता से लिया है। हत्या के मामले में जेल में बंद आरोपी के पोस्टमार्टम में शरीर पर 35 चोटों के निशान मिलने पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि धारा 302 के मामले में जेल में बंद आरोपी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके शरीर पर इतनी चोटें कैसे आईं।
हिरासत में हिंसा पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि हिरासत में हिंसा और मौत की घटनाएं कानून के शासन पर गंभीर आघात हैं। जेल या लॉकअप में बंद व्यक्ति पूरी तरह असहाय स्थिति में होता है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य के अधिकारियों की होती है। ऐसे में वर्दी और अधिकार की आड़ में होने वाली हिंसा को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में सुप्रीम कोर्ट का लहरा बाई तामरे बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामला भी लाया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत की जांच CBI से कराने का आदेश दिया था। साथ ही पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
परिवार को 7.50 लाख रुपये मुआवजा
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मृतक के परिवार को 7.50 लाख रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। जिला जेल महासमुंद के सहायक जेल अधीक्षक की 21 सितंबर 2025 की सूचना के अनुसार यह राशि 20 सितंबर 2025 को परिवार को भुगतान की गई थी।
हालांकि, मुआवजा दिए जाने के बावजूद हाई कोर्ट ने मौत की परिस्थितियों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज 35 चोटों के निशानों पर स्पष्टीकरण मांगना जरूरी समझा है।
31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और DGP को व्यक्तिगत शपथ पत्र में यह बताने का निर्देश दिया है कि जेल में बंद आरोपी की मौत कैसे हुई और उसके शरीर पर पोस्टमार्टम के दौरान 35 चोटें कैसे पाई गईं। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी।



