विशेष लेख : नवजात का पहला सुरक्षा कवच है मां का दूध, पहले घंटे में स्तनपान और 6 महीने तक सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग की सलाह

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, 5 अगस्त 2026/ विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और शुरुआती छह महीने तक केवल माँ का दूध देना बच्चे के लिए सबसे जरूरी है। स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है, जिससे आराम, गर्माहट और सुरक्षा की भावना मिलती है, जो स्वस्थ भावनात्मक विकास में सहायक होती है।
स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाती है
हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक दुनिया भर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं और समाज को शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार, शिशु के जन्म के बाद पहला घंटा और शुरुआती छह महीने उसका पूरा जीवन संवारने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और श्वसन संबंधी संक्रमणों का खतरा कम होता है। WHO के अनुसार, इष्टतम स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाकर हर वर्ष लाखों शिशु मृत्यु रोकने की क्षमता रखता है।
अमृत तुल्य है पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम)
जन्म के पहले कुछ घंटों में माँ का दूध सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक होता है। जन्म के बाद का पहला घंटा (गोल्डन आवर) स्तनपान शुरू करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
त्वचा से त्वचा का शुरुआती संपर्क सफल स्तनपान की संभावना बढ़ाता है और बच्चे के तापमान, हृदय गति तथा रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
शिशु के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) मिलने वाला माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज, प्रोटीन और विटामिन होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर नवजात को विभिन्न संक्रमणों से बचाते हैं।
शुरुआती 6 महीने केवल और केवल मां का दूध
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि जन्म से 6 महीने तक बच्चे को केवल माँ का दूध ही दिया जाए। इस दौरान पानी, ऊपर का दूध या शहद देने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि माँ के दूध में बच्चे की भूख और प्यास दोनों मिटाने के लिए पर्याप्त पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
6 महीने पूरे होने के बाद स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को ऊपरी पौष्टिक आहार देना शुरू किया जा सकता है, जिसे 2 वर्ष या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।
स्तनपान के बहुआयामी लाभ
स्तनपान बच्चों के लिए स्वास्थ्य का वरदान है। इससे दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुपोषण का खतरा काफी कम हो जाता है। अध्ययनों के अनुसार, स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। साथ ही आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज और अस्थमा जैसी क्रोनिक बीमारियों का खतरा भी कम होता है।
मां के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है। यह प्रसव के बाद वजन घटाने और गर्भाशय को सामान्य आकार में लाने में मदद करता है। साथ ही मां और बच्चे के बीच भावनात्मक और अटूट संबंध स्थापित होता है।
समाज और परिवार की जिम्मेदारी
स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की साझी जिम्मेदारी है। जानकारी के अभाव, सामाजिक रूढ़ियों और कामकाजी माहौल में सुविधाओं की कमी के कारण कई महिलाएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं।
प्रसव के बाद मां को सही पोषण, मानसिक शांति और पर्याप्त आराम मिलना आवश्यक है। कामकाजी माताओं के लिए क्रेच सुविधा, मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) और ब्रेस्टफीडिंग ब्रेक जैसी सुविधाएं उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। साथ ही बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित एवं स्वच्छ फीडिंग रूम की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
स्तनपान एक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी की नींव
विश्व स्तनपान सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को उनका मौलिक अधिकार – माँ का दूध दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। जब एक मां बिना किसी संकोच और बाधा के अपने बच्चे को स्तनपान करा सकेगी, तभी कुपोषण-मुक्त और स्वस्थ समाज का सपना साकार होगा।



