RTI पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जनहित के बिना किसी की निजी जानकारी नहीं मिलेगी, विवाह पंजीयन दस्तावेज देने से कोर्ट का इनकार

बिलासपुर, 05 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी, जैसे विवाह पंजीयन आवेदन, जन्मतिथि, पहचान पत्र या अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज, किसी तीसरे पक्ष को आरटीआई के तहत नहीं दिए जा सकते, जब तक कि उससे जुड़ा कोई बड़ा जनहित साबित न हो।
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए दो याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आरटीआई अधिनियम का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन कानून की धारा 8(1)(j) के तहत नागरिकों की निजता की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
क्या था मामला?
अंबिकापुर निवासी डीके सोनी ने सूरजपुर जिले के विशेष विवाह अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत विवाह पंजीयन आवेदन, उससे जुड़े दस्तावेज, आदेश और इश्तहार की प्रमाणित प्रतियां आरटीआई के माध्यम से मांगी थीं। जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि आवेदक तीसरा पक्ष है और मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत प्रकृति की है।
बाद में राज्य सूचना आयोग ने भी अधिकारियों के फैसले को सही ठहराते हुए द्वितीय अपील खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीयन आवेदन में नाम, पता, फोटो, जन्मतिथि और पहचान पत्र जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी होती है। यदि आवेदक यह साबित नहीं कर पाता कि जानकारी का संबंध किसी बड़े जनहित, भ्रष्टाचार के खुलासे या पद के दुरुपयोग से है, तो ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना व्यक्ति की निजता का उल्लंघन होगा।
इसी आधार पर अदालत ने याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल सूचना मांगने भर से किसी की निजी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।



