
बिलासपुर, 11 जुलाई 2026
बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को अस्पताल प्रबंधन से मुलाकात कर मरीज राजकुमार अग्रवाल के उपचार, रेफरल प्रक्रिया और इमरजेंसी व्यवस्था में कथित लापरवाही पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। हालांकि, इन आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील मामले के बावजूद अस्पताल के CEO बैठक में मौजूद नहीं रहे। उनकी अनुपस्थिति में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (MS) और वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल एक मरीज का नहीं, बल्कि अस्पताल की पूरी आपातकालीन व्यवस्था, जवाबदेही और संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
तीन महीने से बंद थीं दोनों एम्बुलेंस
कांग्रेस का दावा है कि अस्पताल की दोनों एम्बुलेंस पिछले लगभग तीन महीने से खराब हैं और इस दौरान किसी वैकल्पिक एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई। आरोप है कि गंभीर मरीज को हायर सेंटर भेजने के लिए परिजनों को निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ी। अस्पताल ने केवल निजी एम्बुलेंस संचालक का संपर्क उपलब्ध कराया, जबकि मरीज के साथ अस्पताल का कोई डॉक्टर, नर्स या मेडिकल स्टाफ चकरभाठा एयरपोर्ट तक नहीं गया।
एयर एम्बुलेंस लौटानी पड़ी, बढ़ गया लाखों का खर्च
कांग्रेस के अनुसार, चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंचने पर हैदराबाद से आई एयर एम्बुलेंस की मेडिकल टीम ने मरीज का ऑक्सीजन स्तर बेहद कम पाया। इसके कारण तत्काल एयरलिफ्ट संभव नहीं हो सका और मरीज को वापस अस्पताल लाना पड़ा।
प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि एयर एम्बुलेंस को एक रात रोकने से करीब ₹2.5 लाख का अतिरिक्त खर्च आया। अगले दिन विशेष मेडिकल टीम बुलाने पर लगभग ₹7 लाख और खर्च हुए। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज के परिजनों पर करीब ₹9.5 लाख का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। कांग्रेस का कहना है कि मरीज की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है।
‘मरीज की जान से बढ़कर क्या अस्पताल की नीति?’
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि गंभीर मरीज को सुरक्षित तरीके से हायर सेंटर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी अस्पताल नहीं निभाएगा तो आम नागरिक ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कैसे भरोसा करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने इसे अपनी आंतरिक नीति बताया कि एयर एम्बुलेंस तक मरीज के साथ अस्पताल का स्टाफ नहीं जाएगा।
पुराने मामलों का भी किया जिक्र
कांग्रेस ने कहा कि अपोलो अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर यह पहला मामला नहीं है। प्रतिनिधिमंडल ने कथित फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट प्रकरण और राजेंद्र प्रसाद शुक्ला मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने भी अस्पताल की जवाबदेही और उपचार व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
साथ ही आयुष्मान कार्डधारक गरीब मरीजों के इलाज को लेकर लगातार शिकायतें मिलने का दावा करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यदि सरकारी योजना का लाभ पात्र मरीजों तक नहीं पहुंच रहा है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
17 जुलाई को CEO से मांगा जाएगा जवाब
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि 17 जुलाई को दोबारा अस्पताल प्रबंधन, विशेष रूप से CEO से मुलाकात कर जवाब मांगा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने पूछा है कि तीन महीने तक दोनों एम्बुलेंस खराब रहने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई, गंभीर मरीज के साथ मेडिकल स्टाफ क्यों नहीं भेजा गया, मरीज को सुरक्षित एयर एम्बुलेंस तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी, परिजनों पर लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ क्यों पड़ा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
प्रतिनिधिमंडल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहर) सिधांशू मिश्रा, पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा से विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी, विजय पांडेय, राजेश पांडेय, प्रमोद नायक, राकेश शर्मा, समीर अहमद, जितेंद्र पांडेय, नरेंद्र बोलर, संतोष गर्ग, तजम्मुल हक, हितेश देवांगन, सकेश मिश्रा, सुनील सोनकर, अनिल यादव, अजय यादव, लक्की मिश्रा, संदीप यादव, कमल कश्यप, शेर सिंह, विक्की यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।



