भारतमाला मुआवजा घोटाले में ED की पहली गिरफ्तारी : कारोबारी जयप्रकाश गांधी 3 दिन की रिमांड पर भेजे गए

रायपुर, 04 जून 2026। भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहली गिरफ्तारी करते हुए अभनपुर निवासी कारोबारी जयप्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने उसे मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत विशेष न्यायालय रायपुर में पेश किया, जहां से तीन दिन की रिमांड मंजूर की गई है।
ईडी की जांच छत्तीसगढ़ एसीबी और ईओडब्ल्यू की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। मामला रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है।
56 लाख की जगह 9.83 करोड़ लेने का आरोप
ईडी के अनुसार, जयप्रकाश गांधी ने परिवार के सदस्यों और कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर हाईवे अलाइनमेंट क्षेत्र की जमीन खरीदी। बाद में उसे 500 वर्गमीटर से कम के छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर अधिक मुआवजा प्राप्त करने की योजना बनाई गई। जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके परिजनों ने करीब 9.83 करोड़ रुपए का मुआवजा हासिल किया, जबकि नियमानुसार उन्हें केवल 56.76 लाख रुपए मिलने थे।
शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश
जांच एजेंसी का दावा है कि कथित रूप से प्राप्त 9.27 करोड़ रुपए की अवैध आय को शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश कर वैध संपत्ति का रूप देने का प्रयास किया गया।
अप्रैल में हुई थी छापेमारी
ईडी ने 28 अप्रैल को रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए थे। जांच के दायरे में जयप्रकाश गांधी के भाई गोपाल गांधी और सत्यप्रकाश गांधी भी आए थे।
अन्य आरोपी भी जांच के घेरे में
इस मामले में पहले से हरमीत सिंह खनूजा, खेमराज कोसले, पुनउराम देशलहरे और कुंदन बघेल के खिलाफ विशेष अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया जा चुका है। ईडी का आरोप है कि जमीन खरीद, नामांतरण और मुआवजा भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर कर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया।
जांच जारी
ईडी ने कहा है कि मामले में अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संबंधित सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ और नाम सामने आ सकते हैं।



