
रायपुर, 29 मई 2026। छत्तीसगढ़ में नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) और भारत सरकार के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय डिजिटल इंडिया परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विभिन्न विभागों को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए CHiPS के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने कहा कि नागरिकों के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षित डिजिटल सेवाएं राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि DPDP अधिनियम केवल कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि ‘Privacy by Design’ और ‘Citizen-Centric Data Governance’ की दिशा में बड़ा बदलाव है।
उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा ‘सेवा सेतु’ प्लेटफॉर्म का डिजिलॉकर, उमंग और माय स्कीम जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ सफल एकीकरण किया जा चुका है। इससे नागरिकों को डिजिटल माध्यम से प्रमाण-पत्र और अन्य सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने विभागों से “Digital-by-Default” दृष्टिकोण अपनाने की अपील भी की।
NeGD नई दिल्ली के संचालक सुनील जैन ने कहा कि DPDP अधिनियम सरकारी संस्थाओं के लिए डेटा प्रबंधन की नई जवाबदेहियां तय करता है। इसके प्रभावी पालन से विभागीय पारदर्शिता, जवाबदेही और साइबर सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक पी. रामाराव ने साइबर खतरों को लेकर विभागों को सतर्क करते हुए डेटा न्यूनतमकरण, लॉग मॉनिटरिंग और नियमित सुरक्षा ऑडिट अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां साइबर अपराधियों के मुख्य निशाने पर रहती हैं।
कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने डेटा फिड्यूशियरी, सहमति प्रबंधन, नागरिक शिकायत निवारण, डिजिलॉकर एकीकरण और सुरक्षित दस्तावेज साझा करने जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उमंग और माय स्कीम प्लेटफॉर्म के जरिए अंतिम व्यक्ति तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम के समापन पर CHiPS के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो ने बताया कि कार्यशाला से मिले सुझावों के आधार पर सभी विभागों के लिए 30, 60 और 90 दिनों की चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके जरिए राज्य में DPDP अधिनियम का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
इस कार्यशाला में CHiPS सहित विभिन्न विभागों के 180 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डेटा संरक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एकीकरण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत मंथन किया गया।



