75 साल बाद अबूझमाड़ के कुतुल में पहली होली: सरेंडर नक्सलियों ने उड़ाया गुलाल, कांकेर-महासमुंद में जमकर नाचे

रायपुर, 05 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में इस बार होली का रंग कुछ अलग ही नजर आया। जंगलों में रहकर वर्षों तक त्योहारों से दूर रहने वाले सरेंडर नक्सलियों ने पहली बार खुले दिल से होली का जश्न मनाया। कांकेर और महासमुंद जिले के पुनर्वास केंद्रों में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों ने रंग-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को बधाई दी और ढोल की थाप पर जमकर नाचे।
कांकेर जिले के भानुप्रतापुर स्थित मुल्ला चौगेल पुनर्वास केंद्र में रह रहे सरेंडर नक्सलियों ने बुधवार को पहली बार होली खेली। यहां करीब 40 आत्मसमर्पित नक्सली रह रहे हैं, जिन्हें सिलाई, ड्राइविंग और मैकेनिक जैसे कौशल प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, ताकि वे नई जिंदगी शुरू कर सकें। होली के मौके पर सभी ने रंग-गुलाल लगाकर खुशियां साझा कीं और नई शुरुआत का जश्न मनाया।
वहीं महासमुंद जिले में दो दिन पहले बीबीएम डिवीजन के 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने भी पुनर्वास केंद्र में पहली बार होली मनाई। रंगों के बीच सरेंडर नक्सलियों ने डांस किया और अपने जीवन के नए सफर की शुरुआत का उत्सव मनाया। इस जश्न का वीडियो प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने कहा कि सरेंडर नक्सलियों के चेहरों की मुस्कान बताती है कि पुनर्वास केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत है।
इधर नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के कुतुल इलाके में भी इस साल ऐतिहासिक पल देखने को मिला। जिसे कभी नक्सलियों की राजधानी कहा जाता था, वहां आजादी के बाद पहली बार ग्रामीणों और बच्चों ने खुले दिल से होली मनाई। सुरक्षा बलों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में शांति का माहौल बना है, जिसके चलते लोग बिना डर के त्योहार मनाते दिखाई दिए।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले इलाके में नक्सलियों का खौफ इतना था कि त्योहार मनाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और लोग सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। रंग-अबीर के बीच लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर खुशियां बांटी और शांति के इस नए दौर का स्वागत किया।



