कर्तव्य पथ पर दिखेगी छत्तीसगढ़ की शौर्यगाथा : जनजातीय वीरों को समर्पित झांकी बनेगी आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली, 23 जनवरी 2026।
गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली छत्तीसगढ़ की झांकी इस वर्ष जनजातीय शौर्य, बलिदान और देशभक्ति की जीवंत कहानी पेश करेगी। ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित यह झांकी देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, जो आज़ादी की लड़ाई में जनजातीय नायकों के अतुलनीय योगदान को उजागर करती है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में आयोजित प्रेस प्रीव्यू के दौरान राष्ट्रीय मीडिया के समक्ष झांकी का भव्य प्रदर्शन किया गया। झांकी के माध्यम से उन अमर जनजातीय वीरों को श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दमनकारी कानूनों के खिलाफ संघर्ष करते हुए स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय इस झांकी का प्रमुख केंद्र है। यहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीक के जरिए संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।
विशेषज्ञ समिति से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों और कलाकारों ने एक माह तक दिन-रात मेहनत कर झांकी को अंतिम रूप दिया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए देश के 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया है।
झांकी में उकेरे गए शौर्य और बलिदान के दृश्य
झांकी के अग्र भाग में 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया है। धुर्वा समाज के इस महानायक ने अन्याय के खिलाफ जनजातीय समाज को संगठित किया। आम की टहनियां और सूखी मिर्च, जो भूमकाल विद्रोह के प्रतीक रहे, झांकी में विशेष रूप से प्रदर्शित हैं। विद्रोह की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में नाकाम रहे।
झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दिखाया गया है। अकाल के समय गरीबों के लिए संघर्ष करने वाले वीर नारायण सिंह ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी अग्रणी भूमिका निभाई थी।
पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति का सशक्त संदेश देती है, जो कर्तव्य पथ पर देशवासियों को गौरव और प्रेरणा से भर देगी।



