ग्राफ्टेड बैंगन से खेती में क्रांतिकारी बदलाव: खरसिया के किसान मुरलीधर साहू बने मिसाल

रायपुर, 11 दिसंबर 2025/रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड के ग्राम करूमौहा के किसान मुरलीधर साहू ने आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से खेती में नया इतिहास रच दिया है। ग्राफ्टेड बैंगन की उन्नत तकनीक अपनाकर उन्होंने न केवल पैदावार दोगुनी की, बल्कि कम लागत में लाखों की आय का नया रिकॉर्ड भी बनाया है।
ग्राफ्टेड बैंगन तकनीक ने बदली तस्वीर
ग्राफ्टेड बैंगन दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर तैयार किया जाता है—एक मजबूत जड़ वाला रूटस्टॉक और एक उच्च गुणवत्ता वाला फल देने वाला स्कायन। यह तकनीक मिट्टी जनित रोगों से बचाव, कम लागत और अधिक उत्पादन का भरोसेमंद विकल्प है। यही तकनीक अब मुरलीधर साहू के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई है।
परंपरागत धान से उद्यानिकी फसल की ओर रुझान
पहले पारंपरिक धान की खेती करने वाले मुरलीधर साहू को कम मुनाफे से संतोष नहीं था। उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर मार्गदर्शन लिया, जहां उन्हें आधुनिक खेती, प्रशिक्षण और नई तकनीकों की जानकारी मिली। इसी प्रेरणा ने उन्हें ग्राफ्टेड बैंगन फसल का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कम लागत में दोगुनी पैदावार
- एक हेक्टेयर में ग्राफ्टेड बैंगन की बुवाई
- जैविक खाद और जैविक दवाओं से लागत में भारी कमी
- पहले 80–85 क्विंटल—अब 150 से 170 क्विंटल तक उत्पादन
- गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में शानदार भाव
इसके परिणामस्वरूप इस सीजन में कुल आय लगभग 4.5 लाख रुपये और करीब 3 लाख रुपये शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पहले की तुलना में लगभग तीन गुना है।
बागवानी मिशन योजना का बड़ा योगदान
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत उन्हें 20 हजार रुपये का अनुदान मिला, जिससे संसाधनों की व्यवस्था और तकनीक के उपयोग में आसानी हुई। यह आर्थिक सहयोग किसानों के लिए बड़ा सहारा साबित हुआ।
क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
मुरलीधर साहू की सफलता से प्रभावित होकर आसपास के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के किसान भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि—
सही मार्गदर्शन + आधुनिक तकनीक + सरकारी योजनाओं का लाभ = कृषि में आर्थिक मजबूती
एक हेक्टेयर से बनी मिसाल
साहू ने साबित कर दिया कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो कम जमीन में भी अधिक उपज और बेहतर आय संभव है। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र में नई उम्मीद का स्रोत बन गई है।



