मेडिकल कॉलेज स्कैम में ED की मेगा रेड: 10 राज्यों में धावा, 7 कॉलेजों पर शिकंजा, 55 लाख की रिश्वत का भंडाफोड़

छत्तीसगढ़ समेत 10 राज्यों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मेडिकल कॉलेज स्कैम से जुड़े 15 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा 30 जून को दर्ज की गई FIR के आधार पर की जा रही है। रायपुर में दिल्ली से पहुंची ED टीम ने एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में जांच शुरू कर दी है।
क्या है मामला?
FIR के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के कुछ अधिकारी और सरकारी कर्मचारी मेडिकल कॉलेजों को इंस्पेक्शन में मदद करने के बदले रिश्वत लेते थे। उनका आरोप है कि वे गोपनीय जानकारी कॉलेजों के मैनेजर्स और बिचौलियों को लीक करते थे, जो पैरामीटर्स में हेरफेर कर अकादमिक कोर्स की मंजूरी हासिल कर लेते थे।
किन राज्यों में हुई कार्रवाई?
ED की छापेमारी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में की गई।
7 मेडिकल कॉलेजों और FIR में नामित कई आरोपियों के ठिकानों की तलाशी ली गई।
रायपुर का रावतपुरा मेडिकल कॉलेज भी जांच के दायरे में
CBI ने 5 महीने पहले ही देशभर में 40 से अधिक लोकेशंस पर छापेमारी की थी। उसी कार्रवाई में यह खुलासा हुआ था कि छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) को मान्यता दिलाने के लिए रिश्वत ली गई।
CBI की जांच में सामने आया कि NMC टीम के सदस्यों ने हवाला के जरिए 55 लाख रुपए रिश्वत लेकर SRIMSR के पक्ष में रिपोर्ट तैयार की।
गिरफ्तार आरोपियों में
- डॉ. मंजप्पा सीएन
- डॉ. चैत्रा एमएस
- डॉ. अशोक शेलके
- अतुल कुमार तिवारी
- सथीशा ए
- रविचंद्र के
शामिल हैं।
कैसे पकड़ा गया रिश्वतखोरी का नेटवर्क?
CBI के अनुसार, SRIMSR के निदेशक अतुल कुमार तिवारी के साथ मिलकर निरीक्षण टीम ने साजिश रची।
डॉ. मंजप्पा ने सथीश ए. को हवाला ऑपरेटर से 55 लाख रुपए जुटाने को कहा।
- डॉ. चैत्रा का हिस्सा 16.62 लाख रुपए उनके पति से जब्त किया गया।
- डॉ. मंजप्पा से जुड़े सथीश ए. से 38.38 लाख रुपए बरामद हुए।
CBI ने बेंगलुरु में जाल बिछाकर पूरी राशि बरामद कर ली थी।
आगे क्या?
ED अब मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच कर रही है। कई डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क देशभर में मेडिकल कॉलेज इंस्पेक्शन प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था।



