Chhattisgarh Liquor Scam: 30 आबकारी अधिकारियों को ED का नोटिस, 3,200 करोड़ रुपये का घोटाला, अब तक कोई पेश नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच तेजी पकड़ चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में उस समय प्रदेश के सभी जिलों में पदस्थ रहे करीब 30 आबकारी अधिकारियों को PMLA की धारा 50 के तहत पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। हालांकि अब तक कोई भी अधिकारी पेश नहीं हुआ है।
नोटिस थामे बैठे 30 अफसर
सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों को नोटिस भेजा गया है उनमें —
- 01 अतिरिक्त आयुक्त
- 05 उपायुक्त
- 14 सहायक आयुक्त (3 सेवानिवृत्त)
- 07 जिला आबकारी अधिकारी (4 सेवानिवृत्त)
- 03 सहायक जिला आबकारी अधिकारी
शामिल हैं।
ईडी ने यह नोटिस उस आरोपपत्र के आधार पर जारी किया है जिसे ACB/EOW ने हाल ही में अदालत में पेश किया था।
आरोपपत्र में बड़े नाम शामिल
7 जुलाई को रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल SEOIACB के चौथे पूरक आरोपपत्र में इन सभी 30 अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। इनमें अतिरिक्त आयुक्त आशीष श्रीवास्तव, उपायुक्त अनिमेष नेताम, विजय सेन शर्मा, अरविंद पटले, नीतू नोतानी ठाकुर और नोबर सिंह ठाकुर समेत कई अधिकारी शामिल हैं। वहीं, रिटायर्ड सहायक आयुक्त जी.एस. नुरूटी, वेदराम लहरे और एल.एल. ध्रुव के नाम भी लिस्ट में दर्ज हैं।
घोटाले का आकार 3,200 करोड़ तक पहुँचा
शुरुआत में इस घोटाले का अनुमान 2,161 करोड़ रुपये का लगाया गया था, लेकिन गहन जांच के बाद अब इसका आकार 3,200 करोड़ रुपये आंका गया है। EOW की जांच के मुताबिक:
- पार्ट-ए में ₹319.32 करोड़
- पार्ट-बीएटी में ₹2,174.67 करोड़
- पार्ट-सी में ₹70 करोड़
कुल मिलाकर 2,563 करोड़ रुपये का खुलासा हुआ है। वहीं, ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच इन आंकड़ों को और व्यापक मान रही है।
अब तक की कार्रवाई
अब तक इस मामले में कुल पाँच आरोपपत्र दायर हुए हैं और 13 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जेल में बंद लोगों में कांग्रेस विधायक व पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, व्यवसायी अनवर ढेबर और विशेष सचिव (आबकारी) अरुणपति त्रिपाठी शामिल हैं।
पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास भी गिरफ्तार
इस महीने की शुरुआत में EOW ने पूर्व आबकारी आयुक्त व आईएएस निरंजन दास को गिरफ्तार किया। उन पर नीतियों में हेरफेर कर सरकारी दुकानों के जरिए अवैध बिक्री की अनुमति देने, निविदाओं में हेरफेर करने और डुप्लिकेट होलोग्राम उपलब्ध कराने जैसे गंभीर आरोप हैं।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि दास ने टुटेजा, त्रिपाठी और ढेबर के साथ मिलकर “समानांतर ढांचा” खड़ा किया था, जिसने व्यवस्थित तरीके से आबकारी राजस्व की लूट की।
ED की चेतावनी
ईडी सूत्रों का कहना है कि नोटिस की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है। अगर वे समन का पालन नहीं करते, तो उन्हें अदालत में पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है, जिसमें न सिर्फ नौकरशाह बल्कि बड़े राजनीतिक नाम भी फंसे हुए हैं।



