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Rahul Gandhi: स्‍टे न मिला तो चुनाव तक नहीं लड़ पाएंगे राहुल, जाना होगा जेल, क्‍या है कानूनी रास्‍ता

नई दिल्ली: कांग्रेसी नेता राहुल गांधी को निचली अदालत से मिली दो साल की सजा के बाद उन्हें लोकसभा सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराया गया है। हालांकि जानकार मानते हैं कि अगर इस फैसले पर ऊपरी अदालत से रोक न लगी तो राहुल की दिक्कतें इतनी बढ़ जाएंगी कि उनके लिए चुनाव तक लड़ना मुश्किल हो जाएगा। कानूनी जानकार और सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट विकास सिंह बताते हैं कि निचली अदालत के फैसले को जब हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो उस दौरान अगर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट निचली अदालत के दोष सिद्धि पर रोक लगा देता है तो फिर उसी आदेश में अयोग्य करार दिए जाने पर भी रोक का आदेश पारित करना होगा। इस तरह अपील पेंडिंग रहने के दौरान अयोग्यता पर रोक लग जाएगी और सदस्यता बहाल हो सकती है।

सूरत की कोर्ट ने अपने फैसले में सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गांधी की सजा पर अमल को लेकर एक महीने तक स्टे लगा दिया था। इस दौरान उन्हें अपील दायर करने का मौका दिया गया था। इस दौरान राहुल गांधी अपील दाखिल कर सकेंगे। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि राहुल गांधी को अपील दाखिल करने का मौका नहीं दिया गया और तुरंत अयोग्य करार दिया गया। दरअसल, जैसे ही अपील दाखिल की जाएगी और उस अपील के दौरान अयोग्यता पर रोक लगाते हुए दोष सिद्धि पर भी रोक लगती है तो राहुल की सदस्यता बहाल हो पाएगी।

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क्या तुरंत प्रभाव से संसद सदस्य अयोग्य हो जाता है?कि अयोग्यता की जो कार्रवाई हुई है, वह लिली थॉमस केस के मुताबिक हुई है। 2013 में लिली थॉमस केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने उस प्रावधान को निरस्त कर दिया था, जो सांसद और एमएलए को आपराधिक मामलों में दोषी पाए जाने के बाद भी सदस्यता रद्द होने से बचाता था। सुप्रीम कोर्ट ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल ऐक्ट (आरपीए) की धारा- 8 (4) को अल्ट्रावायरस करार दिया था। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वाले सांसद और एमएलए की अपील दाखिल करने के ग्राउंड पर सदस्यता खत्म नहीं होती थी। इस धारा के निरस्त होने के बाद जो भी जनप्रतिनिधि दोषी पाए जाएंगे, उनकी सदस्यता निरस्त हो जाएगी। इस तरह देखा जाए तो राहुल गांधी के खिलाफ जो कार्रवाई हुई है, वह सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के हिसाब से अपनी जगह दुरुस्त है क्योंकि उस जजमेंट के हिसाब से तुरंत प्रभाव से अयोग्य करार दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

किस स्थिति में सदस्यता बहाल होगी?

सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट ज्ञानंत सिंह बताते हैं कि अनुच्छेद-329 के तहत प्रावधान है कि अगर एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाए तो फिर इलेक्शन पिटिशन पर सुनवाई चुनाव रिजल्ट के बाद ही हो पाएगी। हालांकि अनुच्छेद-32 और अनुच्छेद-226 के तहत सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट याचिका पर सुनवाई कर सकता है। अगर ऊपरी अदालत अयोग्य करार देने पर रोक लगा देती है तो फिर सदस्यता बहाल हो जाएगी। यानी दोषसिद्धि पर रोक के साथ-साथ अयोग्यता करार दिए जाने के फैसले पर भी रोक जरूरी होगी।

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