
00जहां पहले था डर और प्यास, वहां अब हर घर में बह रहा शुद्ध पानी00
रायपुर, 3 अप्रैल 2026: कभी नक्सल भय और पेयजल संकट से जूझता सुकमा जिले का दूरस्थ ग्राम लखापाल आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक जहां ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब हर घर में नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध है। यह बदलाव केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ शासन की नियद नेल्लानार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हो पाया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में कोंटा विकासखंड के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम लखापाल में वह विकास की रोशनी पहुंची है, जिसकी यहां वर्षों से प्रतीक्षा थी।
जहां पानी के लिए थी जद्दोजहद, अब घर-घर बह रहा अमृत
जिला मुख्यालय सुकमा से लगभग 88 किलोमीटर दूर स्थित लखापाल गांव लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट की दोहरी मार झेलता रहा। गांव के 117 परिवार पानी के लिए बोरिंग, कुएं और छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के दिनों में जलस्तर इतना नीचे चला जाता था कि ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था। महिलाओं और बच्चों को कई बार दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था, जिससे समय और मेहनत के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी लगातार बना रहता था।
72 लाख की योजना ने बदल दिया गांव का भविष्य
सुकमा जिले के कार्यपालन अभियंता विनोद कुमार राम ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत लखापाल में 72.01 लाख रुपये की लागत से 4 सोलर पंप टंकी स्थापित की गई। इसके माध्यम से गांव में 117 घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। अब गांव की कुल जनसंख्या 465 को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल मिल रहा है।
महिलाओं की आंखों में राहत, चेहरे पर मुस्कान
गांव की महिला लखे तेलाम भावुक होकर बताती हैं, “पहले पानी के लिए बहुत परेशानी होती थी। नाले और बोरिंग से पानी लाना पड़ता था। कई बार मौसमी बीमारियाँ हो जाती थीं। अब नल से घर में ही दिनभर पानी मिलता है। हम बहुत खुश हैं। योजना बहुत अच्छी है।”
डर के साये से विकास की राह तक
गांव के निवासी तेलाम बुधु बताते हैं, “पहले लखापाल में भय का माहौल था। हमारा गांव नक्सल प्रभावित था। लोग ख़ौफ़ में जीते थे। बिजली, पानी और सड़क की समस्या थी। नक्सली गांव से चावल, दाल और पैसा जमा करते थे। अब बदलाव आ गया है। पंचायत की मीटिंगें ग्राम विकास के लिए होती हैं। बिजली, पानी, राशन और सड़क की सुविधा मिल रही है।”
स्वच्छ जल से स्वास्थ्य में सुधार, बीमारी में कमी
जल जीवन मिशन के लागू होने के बाद लखापाल में सिर्फ पानी की सुविधा ही नहीं आई, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। जलजनित बीमारियों में कमी आई और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया।
अब सब्जी-बाड़ी से आत्मनिर्भरता की ओर गांव
नल जल योजना से पानी मिलने के बाद ग्रामीणों ने खेती और बाड़ी की ओर कदम बढ़ाया। अब घर के आसपास टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी, सेमी और खट्टा भाजी उगाई जा रही है। इससे घर में सब्जी की व्यवस्था के साथ-साथ बाजार से खर्च भी बच रहा है।
प्रशासन की बड़ी उपलब्धि
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया, “जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्राम लखापाल जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है। इससे ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और स्वास्थ्य में सुधार होगा। शासन की मंशा के अनुरूप जिले के प्रत्येक गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी।”
ग्रामीणों ने जताया आभार
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। घर में नल से पानी मिलने से जीवन आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक बन गया है।
लखापाल बना उदाहरण – विकास हर कोने तक पहुंच रहा है
जल जीवन मिशन ने साबित कर दिया है कि जब योजनाएं ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ लागू होती हैं, तो नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है। आज लखापाल गांव केवल पानी की सुविधा ही नहीं पा रहा, बल्कि भय से मुक्त होकर आत्मनिर्भरता और विकास की राह पर अग्रसर है।



