UNEP ने जारी किए ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ 2025’ अवॉर्ड, भारत की IAS सुप्रिया साहू को मिला बड़ा सम्मान

नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025/ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने बुधवार को साल 2025 के ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ अवॉर्ड्स की घोषणा कर दी है। इस वैश्विक और प्रतिष्ठित पर्यावरण सम्मान में भारत का नाम IAS सुप्रिया साहू ने रोशन किया है। तमिलनाडु सरकार में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू को ‘इंस्पिरेशन एंड एक्शन’ श्रेणी में सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया।
30 साल से पर्यावरण संरक्षण की मिसाल
सुप्रिया साहू ने तीन दशकों के प्रशासनिक कार्यकाल में
- प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण
- वन्यजीव संरक्षण
- जलवायु अनुकूलन
- और प्रकृति-आधारित समाधान
जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
नीलगिरी की कलेक्टर रहते हुए उन्होंने हाथियों और हिरणों को प्लास्टिक खाते देखा, और इसी घटना ने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने साल 2000 में ‘ऑपरेशन ब्लू माउंटेन’ चलाकर नीलगिरि में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया।
इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी की स्थापना की, जो तटीय सुरक्षा और जलवायु परियोजनाओं पर केंद्रित है।
लाखों लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक प्रभाव
UNEP के अनुसार, सुप्रिया साहू ने—
- इकोसिस्टम रेस्टोरेशन
- सस्टेनेबल कूलिंग इनोवेशन
- नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस
के क्षेत्र में बेहतरीन नेतृत्व दिखाया है।
उनकी पहल ने
- लाखों ग्रीन जॉब्स सृजित किए,
- 12 मिलियन लोगों को जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) से मजबूत किया,
- राज्य के फॉरेस्ट कवर को बढ़ाया,
- मैंग्रोव क्षेत्र को दोगुना किया
- और वेटलैंड संरक्षण के काम को नई दिशा दी।
क्या बोलीं सुप्रिया साहू?
सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने नीलगिरि में अपने अनुभव को याद किया और कहा—
“मैंने जानवरों को प्लास्टिक कचरा खाते देखा और महसूस किया कि हमारा ग्रह घुट रहा है। उसी क्षण ने मुझे पर्यावरण संरक्षण की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।”
UNEP ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सब-नेशनल स्तर पर जलवायु कार्रवाई का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे दुनिया भर के प्रदेश अपना सकती हैं।



