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ई-रिक्शों से ट्रैफिक बेहाल: न परमिट, न रिकॉर्ड; नियम तोड़ने पर भी नहीं हो रही कार्रवाई

रायपुर, 09 अप्रैल 2026/ राजधानी रायपुर में ई-रिक्शों की अनियंत्रित आवाजाही से ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर सिग्नल तोड़ना, बीच सड़क पर सवारी बैठाना और अव्यवस्थित तरीके से खड़े रहना आम बात हो गई है। स्टेशन चौक, फाफाडीह, अंबेडकर अस्पताल, जयस्तंभ, आमापारा, लोधीपारा, अवंति बाई चौक, कलेक्टोरेट, कपड़ा मार्केट, कालीबाड़ी और पचपेड़ी नाका जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं।

पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ई-रिक्शा चालक नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। कई बार समझाने पर चालक अभद्र व्यवहार तक करने लगते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनके खड़े होने के लिए कोई तय स्टैंड या स्टॉपेज नहीं है, जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति बनती रहती है।

तकनीकी दिक्कतों से कार्रवाई प्रभावित
पुलिस का कहना है कि ई-रिक्शों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन तकनीकी समस्याएं बाधा बन रही हैं। ग्रीन नंबर प्लेट कैमरों में साफ कैद नहीं हो पाती, जिससे ई-चालान करने में दिक्कत आती है। ऐसे में मौके पर फोटो लेकर मैन्युअल कार्रवाई करनी पड़ रही है।

न परमिट, न कोई ठोस नीति
शहर में ई-रिक्शा संचालन के लिए अब तक कोई स्पष्ट नीति या नियम लागू नहीं किए गए हैं। नगर निगम, जिला प्रशासन और आरटीओ के पास न तो कोई तय रूट प्लान है और न ही वाहनों की संख्या को लेकर कोई सर्वे। बिना परमिट और बिना ड्राइवर रिकॉर्ड के बड़ी संख्या में ई-रिक्शा सड़कों पर चल रहे हैं।

कागजों में ही सिमटा प्लान
ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस ने शहर को चार जोन में बांटकर ई-रिक्शों का संचालन तय करने का प्रस्ताव दिया था। इसमें रूट निर्धारण और संतुलित वितरण की योजना शामिल थी, लेकिन यह प्रस्ताव अब तक लागू नहीं हो सका है।

नतीजा—बढ़ता जाम, घटती व्यवस्था
बिना योजना के बढ़ते ई-रिक्शों ने न सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ दिया है, बल्कि शहर की यातायात प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है सख्त नियम, तय रूट और प्रभावी मॉनिटरिंग की, ताकि राजधानी की सड़कों पर व्यवस्था बहाल हो सके।

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Manish Tiwari

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