छत्तीसगढ़
Trending

दीदी के बखरी से बदल रही तस्वीर: कांकेर में 3364 महिलाएं एकीकृत खेती से कमा रहीं 25 हजार महीना

रायपुर, 12 अप्रैल 2026/ सब्जी बाड़ी, पोषण वाटिका, मुर्गी पालन, वनोपज संग्रहण और मछली पालन ग्रामीण भारत में समृद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के प्रमुख स्तंभ बन रहे हैं। ये गतिविधियां न केवल परिवार को ताजी और पौष्टिक सब्जियां व प्रोटीन प्रदान करती हैं, बल्कि अतिरिक्त आय का जरिया भी बनती हैं। महिला आजीविका में वृद्धि के लिए एकीकृत कृषि से संबंधित “दीदी के बखरी” कार्य अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है, जिसे देखकर बाकी दीदियां भी अपने जीवन स्तर में सुधार लाने और आय बढ़ाने पर कार्य कर रही हैं।

उत्तर बस्तर कांकेर जिले में बिहान योजना के तहत महिलाओं की आजीविका में वृद्धि हेतु विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में बड़ी संख्या में दीदियां आय मूलक गतिविधियों से जुड़कर अपने जीवन स्तर में सुधार कर रही हैं। अपनी आय बढ़ाने के लिए एकीकृत कृषि के साथ अन्य लाइवलीहुड एक्टिविटी भी अपना रही हैं। इसमें अपने घर की बखरी (बाड़ी) में व्यावसायिक रूप से सब्जी-भाजी उत्पादन कर बाजार में बिक्री, साथ ही मछली पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालनवनोपज संग्रहण जैसे कार्य शामिल हैं।

इस प्रकार एकीकृत कृषि मॉडल जिले के चार विकासखंड— नरहरपुर, कांकेर, भानुप्रतापपुर और चारामा में संचालित है। प्रत्येक संकुल में चार गांवों का चयन किया गया है। योजना का उद्देश्य महिला किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है, जिससे उनकी औसत मासिक आय 20 से 25 हजार रुपए तक पहुंच सके।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में यह योजना “दीदी के बखरी” नाम से सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। विकासखंड नरहरपुर में 1200, कांकेर में 790, चारामा में 734 और भानुप्रतापपुर में 640—इस प्रकार कुल 3364 महिला किसान विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 में 10,780 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रत्येक क्लस्टर स्तर पर आजीविका सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जो स्वयं दीदियों द्वारा संचालित होंगे। इन केंद्रों के माध्यम से बीज, कृषि उपकरण और खाद जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

हाल ही में मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने नरहरपुर, चारामा, भानुप्रतापपुर और कांकेर क्षेत्रों का दौरा कर महिला किसानों से संवाद किया और उनके कार्यों की जानकारी ली।

नरहरपुर विकासखंड के सुदूर ग्राम पंचायत रावस और बांस पत्तर में महिला किसान सुरेखा नेताम द्वारा विकसित बखरी में ग्राफ्टेड सब्जियां और मुर्गी पालन को देखकर सराहना की गई। सुरेखा ने बताया कि हरी पत्तेदार सब्जियां, कंदमूल और फल एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने में सहायक हैं और बच्चों व माताओं को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं।

ग्राम ठेमा की महिला किसान नामिका यादव द्वारा किए जा रहे वनोपज संग्रहण, मुर्गी पालन और मछली पालन के कार्यों की भी प्रशंसा की गई। उन्होंने बताया कि ग्रामीण और जनजातीय समुदाय महुआ, इमली, शहद, लाख और विभिन्न जड़ी-बूटियों का संग्रहण कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।

भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम हाटकर्रा की महिला मोतिन दर्रो ने बताया कि पोल्ट्री-कम-फिश मॉडल (Poultry-cum-Fish) से लागत कम और लाभ अधिक होता है, क्योंकि मुर्गियों की बीट मछलियों के लिए चारा बन जाती है।

इसी तरह बकरी पालन, मछली पालन और सूरजमुखी की खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है। ग्राम धनेली की महिला जमुना कोर्राम से आजीविका डबरी की जानकारी ली गई, वहीं कठोली की दीदी से उनकी मासिक आय के बारे में चर्चा कर उन्हें और प्रोत्साहित किया गया।

👉 “दीदी के बखरी” पहल न सिर्फ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि पोषण, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है।

IMG 20250811 172353
Manish Tiwari

Show More

Related Articles

Back to top button