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अनाथ होने का दर्द, पीठ की चोट की चुनौती… फिर भी इसाक बने चैंपियन, केआईटीजी में जीता गोल्ड

रायपुर, 29 मार्च 2026।मिजोरम के युवा वेटलिफ्टर इसाक मालसावमटलुआंगा ने कठिन परिस्थितियों और निजी दुखों को मात देते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। महज 18 साल की उम्र में इसाक की यह उपलब्धि संघर्ष, हौसले और समर्पण की मिसाल बन गई है।

कम उम्र में ही माता-पिता को खो देने के बाद इसाक का जीवन पूरी तरह बदल गया था। 2018 में सड़क दुर्घटना में पिता का निधन हुआ और 2024 में मां कैंसर से चल बसीं। इन गहरे आघातों ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने वेटलिफ्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था।

लेकिन उनके चाचा और बचपन के कोच ने हार नहीं मानने दी। उन्होंने इसाक को लगातार प्रेरित किया, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी इसाक ने अपने खेल को जारी रखा।

रायपुर में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान भी चुनौतियां कम नहीं थीं। पीठ की चोट से जूझते हुए इसाक ने पहले स्नैच में दूसरा स्थान हासिल किया, लेकिन क्लीन एंड जर्क में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए कुल 235 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीत लिया।

जीत के बाद भावुक पल तब देखने को मिला जब उनके चाचा ने उन्हें गले लगाकर खुशी जाहिर की। यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि संघर्षों पर विजय की कहानी बन गई।

वर्तमान में इसाक भारतीय खेल प्राधिकरण के इम्फाल स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे हैं और साथ ही कक्षा 12 की पढ़ाई भी कर रहे हैं।

इससे पहले भी इसाक ने 2024 की यूथ नेशनल चैंपियनशिप और 2025 की जूनियर प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।

इसाक की कहानी यह साबित करती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।

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Manish Tiwari

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