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छाती के दुर्लभ कैंसर का सफल ऑपरेशन : अंबेडकर अस्पताल रायपुर में बची 29 वर्षीय युवक की जान

रायपुर, 30 दिसंबर 2025।पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के कैंसर सर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। यहां छाती के अत्यंत दुर्लभ और जटिल कैंसर मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर से पीड़ित 29 वर्षीय युवक की सफल सर्जरी कर उसकी जान बचाई गई।

मरीज छाती में गांठ, सांस लेने में तकलीफ और लगातार दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा था। जांच में पता चला कि उसके सीने के मध्य भाग में स्थित गांठ का आकार लगभग 13×18×16 सेंटीमीटर था, जो हृदय के पास मौजूद बड़ी रक्त नलिकाओं से चिपकी हुई थी, जिससे यह मामला अत्यंत जोखिमपूर्ण बन गया था।

पहले कीमोथेरेपी, फिर हाई-रिस्क सर्जरी

कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि मरीज का इलाज पहले एम्स रायपुर में चल रहा था, जहां बायोप्सी में मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर की पुष्टि हुई। गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले जनवरी 2025 से जून 2025 तक छह चक्र कीमोथेरेपी दी गई, जिससे गांठ का आकार घटकर 4×3×4 सेंटीमीटर रह गया।

इसके बाद मरीज को अंबेडकर अस्पताल रेफर किया गया, जहां सभी रिपोर्टों की समीक्षा के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। हृदय सर्जरी और निश्चेतना विभाग से परामर्श के बाद लगभग 3 से 4 घंटे चली जटिल सर्जरी में गांठ को बाएं फेफड़े के एक हिस्से के साथ सफलतापूर्वक निकाल दिया गया।

मरीज स्वस्थ, फॉलो-अप जारी

सर्जरी पूरी तरह सफल रही और कुछ दिनों के इलाज के बाद मरीज को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल मरीज नियमित रूप से फॉलो-अप के लिए चिकित्सालय आ रहा है।

इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में डॉ. आशुतोष गुप्ता, डॉ. के. के. साहू, डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सुश्रुत अग्रवाल, डॉ. समृद्ध, डॉ. लावण्या, डॉ. सोनम और डॉ. अनिल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

क्या है मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर?

मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर छाती के मध्य भाग में जर्म कोशिकाओं से उत्पन्न होने वाला एक दुर्लभ कैंसर है, जो आमतौर पर 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों में पाया जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ और छाती में दर्द शामिल हैं। इसका इलाज कीमोथेरेपी और सर्जरी के संयोजन से किया जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार यदि इस बीमारी का समय पर पता चल जाए और सही इलाज किया जाए तो पांच साल का सर्वाइवल रेट 90 प्रतिशत से अधिक होता है।


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Manish Tiwari

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