
रायपुर, 18 मार्च 2026। प्रदेश में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता और उपभोक्ताओं तक उसकी नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार निगरानी और समीक्षा की जा रही है। खाद्य सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने खाद्य संचालक तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ बैठक कर एलपीजी बुकिंग व्यवस्था को और अधिक सुलभ बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में घरेलू एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग को आसान बनाने के लिए व्हॉट्सएप नंबर, मोबाइल नंबर, आईवीआरएस और वेबसाइट यूआरएल के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा जारी नए बुकिंग नंबर (मोबाइल 8927225667 और आईवीआरएस 8391990070) को भी आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि घरेलू एलपीजी के दुरुपयोग को रोकने के लिए खाद्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक 214 छापों में 1013 घरेलू एलपीजी सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं। इनमें रायपुर जिले में सबसे अधिक 392 और बिलासपुर जिले में 201 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई सुनिश्चित करती है कि घरेलू गैस का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो और आम उपभोक्ताओं को उसका पूरा लाभ मिल सके।
खाद्य सचिव ने लंबित एलपीजी बुकिंग को जल्द पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी जिलों में गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाई गई है, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी वितरण के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सैन्य और अर्द्धसैनिक बलों के कैंप, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट की कैंटीन को उनकी मासिक आवश्यकता के अनुसार गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, कैंटीन और गेस्ट हाउस को पिछले महीनों के उपभोग के आधार पर 50 प्रतिशत तक तथा पशु आहार और बीज उत्पादन इकाइयों के साथ होटल एवं रेस्टोरेंट को निर्धारित सीमा (20 प्रतिशत) के अंतर्गत कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।
एलपीजी बुकिंग और आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए खाद्य विभाग का कॉल सेंटर (1800-233-3663 और 1967) भी सक्रिय है, जहां प्राप्त शिकायतों का ऑयल कंपनियों के साथ समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है।



